इंदौर. सिंहस्थ-2016 में एमआर-10 (मेजर रोड क्र.. 10) पर बढ़ते ट्रैफिक लोड को कम करने के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण एमआर-11 बनाएगा। शहर के मास्टर प्लान- 2021 में प्रस्तावित इस मेजर रोड के निर्माण पर 70 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
हालांकि सिंहस्थ तक पूरी सड़क न बनाते हुए बायपास से एबी रोड को जोड़ने वाले हिस्से में प्रमुखता से काम होगा। आगे यह सड़क निरंजनपुर, एमआर-2 होते हुए चंद्रगुप्त मौर्य चौराहे पर खुलेगी। इससे बायपास से विजय नगर, सुखलिया का पूरा क्षेत्र अलग हो जाएगा और ट्रैफिक शहर के बाहर से निकल जाएगा।
आईडीए ने इसके लिए राज्य शासन से प्रारंभिक स्वीकृति ले ली है। कंसल्टेंट नियुक्त करने के लिए आईडीए ने टेंडर बुलाए थे, जिसमें दो फर्मों ने रुचि दिखाई। पहला टेंडर आया मे. आजाद जैन एंड एसोसिएट्स का तो दूसरा मेहता एंड मेहता एसोसिएट्स का।
अफसरों का कहना है पहले चरण में बायपास से एबी रोड पर (चौधरी का ढाबा के सामने) यह सड़क निकलना है। मास्टर प्लान में प्रस्तावित कुल 60 मीटर चौड़ी सड़क को फिलहाल फोरलेन बनाया जाएगा।
चौधरी का ढाबा के सामने से एबी रोड होते हुए निरंजनपुर चौराहा से घूमकर यह सड़क न्यू लोहामंडी होते हुए ग्राम निरंजनपुर पहुंचेगी। इसे आगे खान नदी को क्रॉस कर रेलवे लाइन के समानांतर जाना है, लेकिन अभी इसे निरंजनपुर से आईडीए की बनी हुई एमआर-2 से लाकर गंदा तालाब रोड होते हुए चंद्रगुप्त मौर्य चौराहे पर निकाला जाएगा।
अधीक्षण यंत्री एस.एस. राठौर के मुताबिक कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया अगली बोर्ड बैठक में होगी। सीईओ दीपक सिंह का कहना है सिंहस्थ में ट्रैफिक का लोड कम करने के अलावा मास्टर प्लान की यह प्रमुख रोड है। सिंहस्थ मद में हम यह काम करना चाहते हैं, जिसकी स्वीकृति भी राज्य शासन ने सैद्धांतिक रूप से दे दी है।
जनता को विकल्प दे देंगे
सिंहस्थ मार्च, 2016 में होगा। अभी हमारे पास डेढ़ साल से ज्यादा का समय है। कोशिश है जनता को, खासकर बायपास से आने वाले लोगों को एक विकल्प मिल जाए, ताकि सीधे उज्जैन जाया जा सके।
- शंकर लालवानी, चेयरमैन, आईडीए
नहीं हटाना होंगी ज्यादा बाधाएं
आईडीए अफसरों की मानें तो बायपास से एबी रोड को जोड़ने वाले हिस्से में प्रमुख काम होना है। इसमें फिलहाल डामर की छोटी सड़क है। जमीन लेने की समस्या नहीं आएगी। आंशिक बाधाएं हैं, उन्हें हटाने में परेशानी नहीं है। सड़क सीमेंटेड बनना है, बस उसी में समय लगेगा। एबी रोड और लोहामंडी के सामने सड़क बनी हुई है तो आगे एमआर-2 का उपयोग भी फिलहाल इसके रूट के लिए हो सकेगा।