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आसान नहीं होगी राह, निगम अफसरों की डगर में रोड़े ही रोड़े!

8 वर्ष पहले
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इंदौर। शहरी सीमा में शामिल किए गए 29 गांवों के नक्शे पास करना नगर निगम के लिए आसान नहीं होगा। इसके लिए उसे न केवल गांवों के नक्शे जुटाना होंगे, बल्कि नियमों में भी कई तरह की ढील देनी होगी। ऐसी कई व्यावहारिक परेशानियों को लेकर शहर के बिल्डर व डेवपलर्स के्रडाई के माध्यम से शुक्रवार को नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर और प्रमुख सचिव एस.पी.एस. परिहार से मिले।

मंत्री ने आश्वस्त किया कि परेशानियों का प्रकरणवार समाधान किया जाएगा। मंत्री ने निगमायुक्त को भी विशेष सेल बनाने के निर्देश दिए, ताकि समय पर भवन अनुज्ञा से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो सके। बैठक में कलेक्टर ने बताया 29 गांवों के नक्शों को एक महीने में कम्प्यूटराइज्ड कर लिया जाएगा। तब तक मैन्युअल नक्शे पास करने पर आगे निर्णय लेंगे। बैठक में क्रेडाई अध्यक्ष विजय मीरचंदानी, सचिव संदीप श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष लीलाधर माहेश्वरी आदि मौजूद थे।

यह आएगी परेशानी

:निगम का सिस्टम ऑनलाइन है। गांवों के नक्शे जुटाने और उन्हें कम्प्यूटराइज्ड करने में समय लगेगा।
:संबंधित ग्राम पंचायतों से किसी भी तरह की अनुमति ली जाएगी या नहीं, यह तय नहीं।
:ग्राम पंचायत से नक्शे पास करवा रहे इंजीनियर व आर्किटेक्ट निगम में रजिस्टर्ड नहीं हैं। ऐसे में बड़े नक्शों में यह परेशानी भी आएगी।
:निगम मुख्यालय पर पांच बीओ और बीआई का सिस्टम है। प्रत्येक के पास तीन जोन हैं, जिसमें 10 से ज्यादा वार्ड हैं।
: इंजीनियरों की टीम अलग से बनाना होगी।
: इनका रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए भी स्टाफ की जरूरत होगी।

क्रेडाई ने उठाई मांग

: 29 गांवों में नक्शे की अनुमति में संपत्तिकर का अनापत्ति प्रमाण-पत्र न मांगा जाए, क्योंकि यहां निगम की दरें तय नहीं हैं।
: 5 फरवरी 2013 के पूर्व के नक्शे निगम के ऑनलाइन सिस्टम में नहीं हंै, इसलिए ये नक्शे मैन्युअल पास किए जाएं।
: किसी डेवलपर ने इस आदेश के पहले टीएंडसीपी से स्वीकृति ली है तो उसे पहले की तरह भवन निर्माण में गरीबों के मकान, एलआईजी और एमआईजी की अनुमति दी जाए। इसके लिए शासन निगम को आदेश दे।
: लीज केस में देरी, हाईराइज के लिए फायर एनओसी, खाली प्लॉट के टैक्स में आ रही अनियमितता को भी दूर किया जाए।

निगम एक्ट ही होगा प्रभावी

॥इन गांवों पर नगर निगम एक्ट पूरी तरह प्रभावी होगा। ग्राम पंचायतों के एक्ट को लेकर ग्रामीण विकास विभाग तय करे। भवन निर्माण की अनुमति निगम एक्ट, भूमि विकास नियम और मास्टर प्लान के मुताबिक ही दी जाएगी।
- एस.पी.एस. परिहार, प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन विभाग