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डाउनलोड करेंइंदौर. साढ़े तीन साल के युवान की आंख के ऑपरेशन के दौरान लापरवाही के कारण हुई मौत में दोषी तीनों डॉक्टरों को एमवाय अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने क्लीन चिट दी थी। पुलिस ने मौत के कारणों को लेकर सवाल किए तो एनेस्थीसिया की मात्रा का पता करने का कह दिया। इस कारण जांच में ज्यादा समय लगा। आखिरकार एसडीएम की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की।
आंख के तिरछेपन के इलाज के लिए युवान को पिता जितेंद्रसिंह पंवार ने आरएनटी मार्ग स्थित अलोहा अस्पताल में भर्ती कराया था। 2 मई 2012 की सुबह १क् बजे ऑपरेशन टेबल पर उसकी मौत हो गई। संयोगितागंज एसडीएम सुधीर तारे की रिपोर्ट पर छोटी ग्वालटोली पुलिस ने डॉ. प्रवीण पिता जगदीशप्रसाद गोयल निवासी रेसकोर्स रोड, डॉ. हेमंत अठावले निवासी इंद्रलोक कॉलोनी और डॉ. वीरेंद्र पिता रामानंद झा निवासी शालीमार टाउनशिप के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है।
डॉक्टरों ने युवान को एनेस्थीसिया का ओवरडोज दिया था, जिससे उसकी जान गई। यह जांच पूरी करने में पुलिस को 15 महीने लग गए। टीआई रामनारायण शर्मा ने बताया सीधे तौर पर डॉक्टरों की लापरवाही नजर आने के बावजूद केस दर्ज करने में इसलिए समय लगा, क्योंकि पुलिस सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के अनुसार मेडिकल बोर्ड और प्रशासन की जांच के बिना केस दर्ज नहीं कर सकती थी।
मेडिकल बोर्ड ने उलझा दिया था मामला- टीआई ने बताया पुलिस ने एमवाय के मेडिकल बोर्ड को जांच सौंपी थी। नेत्र विभाग की एचओडी डॉ. उल्का श्रीवास्तव, एनेस्थीसिया विभाग के एचओडी डॉ. एसएल लाड और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. केके अरोरा के बोर्ड ने तीनों आरोपी डॉक्टरों के बयान लेकर उन्हें क्लीन चिट दे दी।
13 जुलाई 2012 को एमजीएम मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. पुष्पा वर्मा ने यह रिपोर्ट पुलिस को भेजी। पुलिस ने मौत के कारण बताने के लिए बोर्ड को फिर पत्र लिखा। इस पर डॉक्टरों ने एनेस्थीसिया की क्वांटिटेटिव एनालिसिस रिपोर्ट (युवान को कितनी मात्रा दी) मांगी। रिपोर्ट के लिए पुलिस ने युवान का विसरा, एनेस्थीसिया की खाली बॉटल और अन्य साक्ष्य सागर स्थित फोरेंसिक लैब भेजे, लेकिन वहां से जवाब आया दवा शरीर में चली गई। मात्रा कैसे पता लगाई जा सकती है? इस बीच पुलिस ने मेडिकल बोर्ड को 10 नवंबर को पत्र लिखकर फिर मौत का कारण बताने का कहा, लेकिन बोर्ड ने जवाब नहीं दिया।
कोर्ट में बताना होगा ऐसी रिपोर्ट क्यों दी- आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ एसडीएम की रिपोर्ट पर केस दर्ज किए जाने के बाद अब बोर्ड के डॉक्टरों को कोर्ट में बताना पड़ेगा कि उन्होंने किस कारण क्लीन चिट दी थी।
मुझे तो जो रिपोर्ट मिली, आगे बढ़ा दी
मुझे मेडिकल बोर्ड ने जो रिपोर्ट दी, मैंने वह पुलिस को भेज दी। इस बारे में बोर्ड की अध्यक्ष डॉ. उल्का श्रीवास्तव ही बेहतर बता सकेंगी।
- डॉ. पुष्पा वर्मा, डीन मेडिकल कॉलेज
हम कैसे बता सकते हैं
मौत कैसे हुई?
हमें डॉक्टरों ने जो मात्रा बताई थी वह ठीक थी। एनेस्थीसिया वाले डॉक्टर भी बोर्ड में थे। उन्होंने भी इस मात्रा को गलत नहीं बताया। इस आधार पर हमने रिपोर्ट दी। हमें क्या पता कि युवान की मौत कैसे हुई? हम तो वहां थे नहीं।
डॉ. उल्का श्रीवास्तव, अध्यक्ष मेडिकल बोर्ड
पुलिस के खिलाफ कोर्ट जाएंगे
भास्कर ने डॉ. प्रवीण गोयल से बात की तो उन्होंने बताया हमें मेडिकल बोर्ड ने क्लीन चिट दी थी। इसके बावजूद पुलिस ने केस दर्ज किया। इसके खिलाफ हम कोर्ट में जाएंगे। उधर, डॉ. वीरेंद्र झा ने बताया युवान मेरे पास ऑपरेशन के लिए आया था। मैंने तो ऑपरेशन शुरू भी नहीं किया था। एनेस्थीसिया से मेरा क्या लेना-देना? पता नहीं मुझे क्यों आरोपी बनाया?
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