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देश के दिग्गजों के बातचीत, 'आज को जीना ही है जीने का सही तरीका'

6 वर्ष पहले
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आईएमए के इंटरनेशनल कॉनक्लेव में आखिरी दिन भी शामिल हुए देश के दिग्गज, सिटी भास्कर ने सभी से की विशेष बातचीत...
हमारी ताकतें - युवा शक्ति व बुजुर्गों का तजुर्बा
आ ज से 20 बीस साल पहले हम हमारी आबादी को हमारी कमी समझते थे। मैं मानता हूं कि यह हमारी सबसे बड़ी संपदा है। यह बात कई बार दोहराई जा चुकी है कि हिंदुस्तान की आबादी का 30 फीसदी युवा हैं। युवा यानी ऊर्जा और इसीलिए हम एक बेहतर भविष्य की उम्मीद कर सकते हैं... लेकिन हमारी एक और शक्ति है हमारे बुजुर्ग। उनका तजुर्बा हमें इस्तेमाल करना चाहिए। वे घर पर बैठना नहीं चाहते। उनके अनुभव सफलता की राह की रोशनी बन सकते हैं। इस रिसोर्स को ज़ाया न होने दें। हम उन्हें मेंटर्स की तरह इस्तेमाल करें।
बड़ी इंडस्ट्री से जॉब नहीं निकलते
बड़े स्तर के उद्योगों से ज्यादा जॉब छोटी कम्पनियों से निकलते हैं। हमें इन्हें बढ़ावा देना होगा। बड़े उद्योगों में मशीनें होती हैं और छोटी कम्पनी में यही काम मैनपावर से लिया जाता है। यहां पूंजी भी कम लगती है और कई नए काम भी होते हैं जहां बड़े क्षेत्र निवेश नहीं करते। इसलिए जरुरी है कि छोटे उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए।
बिजनेस बंद करने में भी हिचकिचाहट ना हो
को ई भी बिजनेस यदि पांच सालों के बाद आपको मनचाहा रिटर्न नहीं देता है तो उसे बेहिचक बंद कर दिया जाना चाहिए। इसमें कुछ भी गलत नहीं है, मैं खुद भी 40 से ज्यादा बिजनेस बंद कर चुका हूं लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि उस बिजनेस को चलाने में कोई कसर बाकी ना रहे। रिस्क लेने से डरें नहीं लेकिन केल्कुलेटेड रिस्क। बिजनेस की ग्रोथ के लिए नेक्स्ट लेवल को देखना जरूरी है।
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