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डाउनलोड करेंइंदौर। प्रशासन, नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस को धता बताते हुए मरीमाता चौराहे के पास भगवान परशुराम की मूर्ति न केवल लगा दी गई बल्कि उसका अनावरण भी करवा दिया गया। नियमों के विपरीत लगी इस मूर्ति का अनावरण सोमवार को उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, स्वास्थ्य राज्यमंत्री महेंद्र हार्डिया के हाथों हुआ। मूर्ति स्थापना को निगम से मंजूरी नहीं मिलने के कारण महापौर कृष्णमुरारी मोघे ने आयोजन से दूरी बनाए रखी। दो दिन पहले तक कागजात मांगने का दावा करने वाले अफसर अब सरकारी भाषा बोलकर खुद को बचा रहे हैं।
मूर्ति की स्थापना भाजपा नेता विष्णु प्रसाद शुक्ला ने करवाई है। वे दोपहर 12 बजे मूर्ति अनावरण होने का कह रहे थे, लेकिन सोमवार को कार्यक्रम स्थल पर करीब साढ़े ग्यारह बजे उद्योग मंत्री, स्वास्थ्य राज्यमंत्री व विधायक रमेश मेंदोला मौके पर पहुंच गए। मूर्ति का अनावरण किया और फटाफट पूजा कर रवाना हो गए। बाद में शुक्ला परिवार ने यज्ञ हवन और विस्तृत पूजा का कार्यक्रम किया। इस दौरान ट्रैफिक जाम भी हुआ।
मई 2012 में निगम से ये प्रस्ताव पास हुआ मूर्ति लगाने के प्रस्ताव पर 2 मई 2012 में निगम की एमआईसी ने प्रस्ताव पास किया था। इसमें कहा था कि प्रस्ताव पर विचार किया गया है, इसे यथोचित स्थान पर लगाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी जाती है और इसके लिए शासन से मंजूरी ले ली जाए।
वैफिक पुलिस ने ली आपत्ति
30 अप्रैल 2013 को निगम को विष्णु शुक्ला का पत्र मिला, जिसमें मूर्ति मरीमाता चौराहे के पास गणोश मंदिर के बाहर लगाने की बात कही गई।इस पर निगम ने एसी (मुख्यालय) को पत्र लिखकर अनापत्ति मांगी। एसी ने इस पर ट्रैफिक पुलिस की राय ली।
इसमें ट्रैफिक पुलिस ने प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए कारण लिखा कि इस चौराहे को व्यवस्थित किया जाना है,यहां से वीआईपी का आना-जाना होता है, भारी वाहन भी यहां से निकलते हैं।गणोश उत्सव के दौरान भी यहां ट्रैफिक जाम की स्थिति होती है, ऐसे में मूर्ति लगने पर वीआईपी रास्ते से मरीमाता चौराहे की ओर आने वाले वाहन चालकों को लेफ्ट टर्न लेने में मुश्किल होगी।
पंचनामा की खानापूर्ति, मूर्ति स्थापना
मूर्ति स्थापना की जानकारी लगने पर तत्कालीन एसडीएम अनुपमा निनामा मौके पर गई थी और पंचनामा भी बनाया
था। बाद में जब क्षेत्र के एसडीएम रजनीश कसेरा बने तो वह भी मौके पर गए थे और काम नहीं करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद भी काम चलता रहा और मूर्ति का अनावरण हो गया। दोनों अफसर मुंह ताकते रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई है मूर्ति स्थापना पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार द्वारा एक निजी सोसायटी को मूर्ति लगाने की मंजूरी दिए जाने के मामले में 15 जनवरी 13 में फैसला दिया है। इसमें साफ कहा है कि अब समय आ गया है कि सार्वजनिक जगहों और ऐसी जगह जो ट्रैफिक को बाधित करती हैं, वहां मंदिर, मसजिद, चर्च, गुरुद्वारे व अन्य धार्मिक निर्माणों को रोका जाए। ऐसी कोई भी मंजूरी नहीं दी जा सकती जो सड़क, फुटपाथ, साइड रोड या अन्य सार्वजनिक उपयोग की जगह को बाधित करे।
संबंधित निगम और सरकार की अन्य एजेंसियों को ऐसे निर्माण रोकने के लिए पूरे अधिकार हैं। जस्टिस आर.एम. लोधा व जस्टिस एस.जे. मुखोपाध्याय ने यह फैसला सुनाया था। मूर्ति का अनावरण करते मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राज्यमंत्री महेंद्र हार्डिया, विष्णुप्रसाद शुक्ला आदि।
अब कह रहे हैं- मामले को दिखवाएंगे
इस मामले में कलेक्टर ने भी चर्चा की थी, लेकिन मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के चलते ध्यान नहीं दे पाया। अब मामले को दिखवाता हूं। -कृष्णमुरारी मोघे, महापौर
प्रशासन बेवजह विवाद कर रहा है
प्रशासन बेवजह विवाद कर रहा है। मूर्ति हमारी निजी जमीन पर लगी है। इसमें किसी को आपत्ति नहीं है, निगम से भी प्रस्ताव पास हुआ था।
- संजय शुक्ला, मूर्ति स्थापक
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