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सम्मान में पहनी कैप, मैडल के लिए उतारी

9 वर्ष पहले
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इंदौर। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मंगलवार को 144 विद्यार्थियों को डिग्री और स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। जिस गरिमा के साथ समारोह होता है, वह इस बार दिखाई नहीं दी। एक दिन पहले की गई आधी-अधूरी रिहर्सल के कारण कुलाधिपति के हाथों मैडल पहनने के लिए विद्यार्थियों को कैप उतारनी पड़ी, जबकि यूनिवर्सिटी एक्ट 1973 के तहत गाउन और कैप पहनने के बाद ही मैडल पहनने की परंपरा है। कैप उतारने का कारण रिबन का छोटा पडऩा है। कुलाधिपति भी बगैर कैप के दिखे। कुलसचिव ने भी कई बार कैप उतार दी। ऑडिटोरियम में शोर-शराबा रोकने के लिए भी अधिकारियों को मशक्कत करना पड़ी। मंच पर कुलपति डॉ. डी.पी. सिंह, कुलसचिव आर.डी. मूसलगांवकर और विशिष्ट अतिथि के रूप में पद्मश्री टीजी कुट्टी मेनन मौजूद थे।


14 पदक लेने वाली छात्रा का गवर्नर हाउस में भी होगा सम्मान- एमबीबीएस में 11 स्वर्ण और तीन रजत पदक से सम्मानित वाणी भराणी का गवर्नर हाउस में भी सम्मान होगा। कुलाधिपति ने इसकी घोषणा की। सबसे कम उम्र की छात्रा 25 वर्षीय प्रियंका पसारी को पीएचडी की डिग्री अवार्ड की गई। कुछ ऐसा करो कि देश छोड़कर न जाएं युवा- कुलाधिपति रामनरेश यादव ने कहा केंद्र व राज्य सरकारें ऐसी नीति बनाएं, जिससे युवाओं को पढ़ाई या नौकरी के लिए देश छोड़कर बाहर न जाना पड़े। पढ़ाई के साथ नैतिकता और संस्कार बेहद जरूरी है।

उच्च शिक्षा में बड़े सुधार की गुंजाइश

मुख्य अतिथि यूजीसी के पूर्व चेयरमैन डॉ. गौतम ने कहा समय आ गया है कि विश्वविद्यालयों को ज्यादा अधिकार और ऑटोनामी दी जाए। हर तरफ लूट और पैसा कमाने की होड़ मची है। अच्छे संस्कार के साथ शिक्षा देने की जरूरत है।
19 को मिली पीएचडी की उपाधि समारोह में 19 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्रदान की गई। पदक पाने वालों में 2010 की बैच के 74 विधार्थी थे, जिन्हें 112 पदक वितरित किए गए। इसी तरह सत्र 2011 के 70 छात्रों को 102 पदकों से सम्मानित किया गया। छात्र राहुल माथुर को सात स्वर्ण और दो रजत के साथ कुल नौ पदक मिले। वहीं की छात्रा फातिमा अलीराजपुरवाला को चार स्वर्ण एवं एक रजत पदक दिया गया।


आज से दो दिन ठप रहेगा काम
इंदौर त्न यूनिवर्सिटी के नालंदा परिसर में 20 और 21 फरवरी को कोई काम नहीं होगा। विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारी संघ ने फिर हड़ताल का निर्णय लिया है। परीक्षाएं करीब आ गई हैं, ऐसे में यह हड़ताल छात्रों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। मंगलवार को भी दीक्षांत समारोह के चलते नालंदा परिसर में छात्रों के काम नहीं हुए। सोमवार को
अधिकारी रिहर्सल में व्यस्त थे। कुलपति डॉ. डीपी सिंह का कहना है कि हड़ताल के कारण ज्यादा काम प्रभावित न हो, इसकी कोशिश की जाएगी।


ये हैं प्रमुख मांगें

  • कर्मचारियों के 105 नए पद तत्काल भरे जाएं।
  • 200 से ज्यादा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
  • शेष का वेतन बढ़ाया जाए।
  • चिकित्सा भत्ता 500 से बढ़ाकर एक हजार रुपए किया जाए।

छात्रों की फजीहत तय

  • न डिग्री निकल पाएगी और न मिलेगा माइग्रेशन।
  • डुप्लीकेट मार्कशीट और मार्कशीट में संशोधन ने जैसे काम अटकेंगे।
  • फाइलें अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाएंगी।
  • परीक्षा, रिजल्ट जैसे काम प्रभावित होंगे।