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ट्रेन हादसा होने के 24 घंटे बाद भी नहीं दिए गए आदेश, खड़े हो रहे कई सवाल

7 वर्ष पहले
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इंदौर. केसरबाग क्रॉसिंग के समीप डंपर के ट्रेन से टकराने के मामले में रेलवे ने 24 घंटे बाद भी जांच के आदेश जारी नहीं किए। ब्रॉड गेज के काम में बरती जा रही लापरवाही के कारण हादसा हुआ। कॉन्ट्रैक्टर और मॉनिटरिंग करने वाले रेलवे के अधिकारी खुद को बचाने की कोशिशों में लगे हैं।
सूत्रों के मुताबिक उनकी इन्हीं कोशिशों के चलते 24 घंटे बाद भी जांच के आदेश जारी नहीं हो पाए। डीआरएम ललिता वेंकटरामन से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने भी कह दिया कि फिलहाल दुर्घटना की समीक्षा की जा रही है।
रेलवे के जानकार घटना में लापरवाही कॉन्ट्रैक्टर और ट्रक ड्राइवर के साथ रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग की भी मान रहे हैं। हादसा न हो इसके लिए ब्रॉड गेज के आस-पास वो सारी व्यवस्थाएं पहले ही कर ली जाना चाहिए थी जो हादसे के बाद गुरुवार को की गईं। न तो इसमें रेलवे के मॉनीटरिंग ऑफिसर ने ध्यान दिया और न ही कॉन्ट्रैक्टर ने नियमों का पालन करने में रुचि दिखाई।
लापरवाही पर जवाब नहीं सूझ रहा अफसरों को

1.इस मामले में भास्कर ने कॉन्ट्रैक्टर श्रवण शुक्ला से बात की तो उन्होंने कहा जो हुआ वह अपनी जगह लेकिन मैं फिलहाल कोई बात नहीं कर पाऊंगा। दो दिन बाद ही कुछ कह सकने की स्थिति में रहूंगा। (उधर, मौके पर कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने तो कभी कॉट्रैक्टर को साइट पर देखा ही नहीं।)
2. रतलाम रेल मंडल के डिप्टी चीफ इंजीनियर (कंस्ट्रक्शन) जेड ए वाहिद के पास भी कोई जवाब नहीं है। उनके पास काम की मॉनीटरिंग की बड़ी जिम्मेदारी है लेकिन जब हादसे को लेकर सवाल किए गए तो बोले- मैं इस मामले में कुछ नहीं कह सकता। वरिष्ठ अफसरों से बात करो..। उनसे यह भी पूछा गया कि आपकी जिम्मेदारी पर वरिष्ठ अफसर क्यों जवाब देंगे तो उनके पास इसका भी कोई जवाब नहीं था।
बड़ा सवाल?
इन नियमों का पालन क्यों नहीं किया
>ट्रैक से साढ़े तीन मीटर (करीब 11 फीट) दूरी पर मटेरियल (गिट्टी) डालना होता है, लेकिन मौके पर ट्रैक के नजदीक ही गिट्टी डाली गई।
> वर्क इन प्रोग्रेस के बोर्ड लगाए जाने थे, लेकिन मौके पर ऐसा कुछ नहीं था।
>सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच में काम होना चाहिए, लेकिन रात को भी मनमानी से काम होता रहा। (अंधेरे में मटेरियल की गुणवत्ता से समझौते की आशंका बढ़ जाती है)