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75 की उम्र, मकान के लिए 18 साल तक लड़ी कानूनी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट में जीती

7 वर्ष पहले
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इंदौर. 75 साल की केसरदेवी बंसल। छावनी में रहती हैं। आसरा देने के लिए अपना घर एक परिवार को किराए पर दे दिया, लेकिन जब मकान खाली करने की बात कही तो विवाद शुरू हो गए। मामला कोर्ट तक पहुंचा। केसरदेवी भी पीछे नहीं हटीं, जिला कोर्ट कोर्ट गईं। वहां से जीत मिली तो किराएदार हाई कोर्ट चला गया। हाईकोर्ट में केसरदेवी हार गईं। केसरदेवी ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
18 साल की कानूनी लड़ाई जीतने के बाद भी मुसीबत कम नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट का आदेश किराएदार ने नहीं माना। केसरदेवी ने जिला कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिखाया। अब फैसला हुआ है कि पुलिस अधिकारी खड़े होकर केसरदेवी का मकान खाली कराएंगे।
एक पीढ़ी जवान हो गई
केसरदेवी के वकील केपी माहेश्वरी के मुताबिक किराएदार छन्नूलाल पिता खरलाल से मकान खाली करान में केसरदेवी के यहां की एक पीढ़ी जवान हो गई। केसरदेवी ने उम्र के 57वें साल में किराएदार से मकान वापस लेने के लिए लड़ाई शुरू की थी। तब दौड़भाग कर लेती थीं। राहत तब मिली है जब कमर झुक गई और घुटनों में दर्द होने लगा।
केसरदेवी काे अब पुलिस दिलवाएगी कब्जा
माहेश्वरी के मुताबिक केसरदेवी ने 1996 से लड़ाई शुरू की थी। सबसे पहले जिला कोर्ट से 24 दिसंबर 2003 को उनके पक्ष में फैसला आया। किराएदार ने इस फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती दी। सेशन कोर्ट से 29 सितंबर 04 को अपील खारिज हो गई। इस पर किराएदार हाई कोर्ट गए।
हाई कोर्ट में हारने के बाद केसरदेवी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद भी मकान खाली नहीं हुआ तो जिला कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिखाया। कोर्ट ने एसपी को मकान खाली करवाकर आगामी नवंबर में रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।