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धार्मिक स्थलों से लाउड स्पीकर हटाने के लिए याचिका

9 वर्ष पहले
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इंदौर. धार्मिक स्थलों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के अनियंत्रित उपयोग से हो रही परेशानियों के संबंध में दायर जनहित याचिका की बुधवार को मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई।
कोर्ट से इन यंत्रों को हटाने के साथ ही विशिष्ट धार्मिक आयोजनों में नियत समयावधि में ही उपयोग की अनुमति देने की मांग की है। अदालत ने 15 मार्च को पुलिस के ओवायसी (प्रभारी अधिकारी) को तलब किया है।
बुधवार को जस्टिस अजीत सिंह एवं जस्टिस शांतनु केमकर की डिविजन बेंच में सुनवाई हुई। वर्ष 2008 में दायर इस याचिका में राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी, कलेक्टर व एसपी इंदौर को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में कहा है कि भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा दिसंबर 2000 को जारी आदेश के परिपालन में मप्र सरकार ने ध्वनि प्रदूषण समस्या निवारण के आदेश सभी राज्य सरकारों एवं पुलिस विभाग को दिए हैं।
अत: धार्मिक स्थलों से ध्वनि विस्तारक यंत्र हटाने के आदेश राज्य सरकार व पुलिस को दिए जाएं। पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने जवाब पेश कर कहा था कि वर्ष 2011 में अस्पतालों के आसपास होने वाले ध्वनि प्रदूषण के 32 व अन्य 94 चालान बनाए गए।
सरकार का जवाब नाकाफी- बुधवार को याचिकाकर्ता पूर्व पार्षद महेश गर्ग की ओर से अधिवक्ता विवेक दलाल ने कहा सरकार का जवाब नाकाफी है। उसका कोई नियंत्रण नहीं है। आदेश पर कोई पालन नहीं हो रहा है। अदालत ने इसे गंभीरता लेते हुए पुलिस के ओवायसी को 15 मार्च को जवाब पेश करने के आदेश दिए।
याचिका के आधार
शासन के आदेश पर एसपी इंदौर ने सभी थाना प्रभारियों को ध्वनि विस्तारक यंत्रों का दुरुपयोग रोकने के आदेश दिए थे किंतु उस पर पालन नहीं होने से 10 गुना उपयोग बढ़ गया है।
ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 के आदेशानुसार अस्पतालों के आसपास सौ मीटर क्षेत्र में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग नहीं किया जा सकता किंतु इंदौर में बेखौफ जारी है।
धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण अनियंत्रित हो गया है। इससे अनिद्रा जैसी गंभीर बीमारियां हो रही हैं।
वर्ष 2004 में तत्कालीन कलेक्टर ने जिला ध्वनि प्रकोष्ठ स्थापित किया था किंतु वह अब कहां है।