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पितृपक्ष में 19 से 21 तक खरीदारी के श्रेष्ठ योग, सर्वार्थसिद्धि योग में मनेगी नवरात्रि

7 वर्ष पहले
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इंदौर. श्राद्धपक्ष और नवरात्रि में कई शुभ संयोग बनेंगे। श्राद्धपक्ष में जहां पुष्य नक्षत्र और दो दिन गजकेसरी योग रहेंगे, वहीं शारदीय नवरात्रि में तीन दिन सर्वार्थसिद्धि का महासंयोग बनेगा। पुष्य नक्षत्र जहां खरीदारी के लिए सर्वश्रेष्ठ रहेगा, वहीं सर्वार्थसिद्धि योग खरीदारी के साथ नए कार्य की शुरुआत के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन है। पं. अरविंद पंड्या के अनुसार 25 सितंबर को हस्त नक्षत्र, ब्रह्म योग, कन्या राशि का चंद्रमा, कर्क राशि के गुरु में देवी नवरात्रि का आरंभ होगा।
किस दिन, कौन-सा योग
पितृपक्ष
> 19 सितंबर : पुष्य नक्षत्र, दिनभर रहेगा।
20-21 सितंबर : गजकेसरी योग। सभी तरह की खरीदी के लिए श्रेष्ठ।

नवरात्रि
> 25 सितंबर : हस्त नक्षत्र, ब्रह्म योग।
> 27 सितंबर : सर्वार्थसिद्धि योग।
> 29 सितंबर : ललिता पंचमी, सर्वार्थसिद्धि योग।
> 3 अक्टूबर : विजयादशमी और सर्वार्थसिद्धि योग।
दो दिन अमावस्या
पितृपक्ष में इस बार अमावस्या दो दिन रहेगी। पंडितों के अनुसार 23 सितंबर को सुबह 9.44 बजे तक चतुर्दशी तिथि है। इसके बाद अमावस्या शुरू होगी, जो 24 सितंबर की सुबह तक रहेगी। पितृ तर्पण, श्राद्ध 23 को होगा। 24 को स्नान-दान और देवकार्य के लिए अमावस्या रहेगी।
पुष्य का स्वामी शनि, संयोग से शनि-गुरु दोनों उच्च राशि में
पुष्य नक्षत्रों का राजा है। इसमें किए गए सभी कार्य स्थिर होते हैं। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। पंडितों के अनुसार फलित ग्रंथों में शनि को इस नक्षत्र का स्वामी माना गया है। गुरु शुभत्व का कारक है और शनि स्थिरता का। इस साल संयोग से शनि भी उच्च राशि तुला में है और गुरु भी अपनी उच्च राशि कर्क में। इस तरह पितृ पक्ष में आ रहे पुष्य नक्षत्र में खरीदी से पितरों का आशीर्वाद भी मिलेगा।
सर्वार्थसिद्धि योग : नवरात्रि में तीन दिन आ रहे सर्वार्थसिद्धि योग भी श्रेष्ठ है। यह सभी कार्य को सिद्ध करने वाला है।