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आईडीए से बोले किसान- योजना लगाने से पहले मौका तो देख लेते

7 वर्ष पहले
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इंदौर. आईडीए हमारी जमीन लेना जानता है, वापस लौटाना नहीं। मधु वर्मा अध्यक्ष थे तो उन्होंने ख्वाब दिखाया था कि आपकी जमीन डॉलर बन जाएगी। वे चले गए, दूसरा बोर्ड आ गया। उसको भी एक साल हो गया पर जमीन वापस नहीं मिली। अब तो परेशान हो गए हैं। हमारी जमीन पर योजना लगाने से पहले कम से कम मौका तो देख लेते।

यह कहना था उन किसानों का जिनकी जमीनें आईडीए की नई स्कीम 177 में आ रही हैं। शुक्रवार को ऐसे 230 आपत्तिकर्ताओं को उनका पक्ष सुनने के लिए बुलाया गया था। मास्टर प्लान में प्रस्तावित एमआर-12 के लिए हो रही इस कार्रवाई से किसान नाराज थे।
जमीन मालिकों का कहना था कि आईडीए ने सुपर कॉरिडोर की चार स्कीमों में जमीनें ली, एग्रीमेंट और रजिस्ट्री की तारीख भी निकल गई लेकिन कुछ नहीं हुआ। सुबह 11 बजे आईडीए अध्यक्ष शंकर लालवानी की मौजूदगी में बोर्ड ने सुनवाई शुरू की।
भांग्या और लसूड़िया मोरी की ज्यादा आपत्तियां
ग्राम भांग्या में एक ही अधिवक्ता के माध्यम से 30 से ज्यादा आपत्तियां लगाई गई। इसी तरह लसूड़िया मोरी की 25 से ज्यादा आपत्तियां सुनी गईं। इसके अलावा कैलोदहाला, शक्करखेड़ी, तलावली चांदा और अरंडिया के किसानों और जमीन मालिकों ने भी आपत्ति दर्ज करवाई।
करीब 130 किसान व जमीन मालिकों की ओर से अधिवक्ता एके हार्डिया और जय हार्डिया ने उनका पक्ष रखा। इनकी आपत्तियों में कहीं मास्टर प्लान के पहले के निर्माण बताए गए तो कहीं टीएंडसीपी, डायवर्शन सहित अन्य विभागों की अनुमति दिखाई गई। एक आपत्ति होलकर काल में दी गई मंदिर की जमीन पर योजना लाने को लेकर थी। आपत्तिकर्ताओं ने अफसरों से कहा कि स्कीम लगाने से पहले मौका देखना चाहिए था।
अब क्या आपकी स्कीम के लिए घर-बार बेचकर कहीं चले जाएं। बोर्ड अध्यक्ष सहित सदस्यों और सीईओ दीपक सिंह ने भी जमीन मालिकों को आश्वस्त किया कि घबराएं नहीं, मौका देखने के बाद ही कमेटी उचित निर्णय लेगी। बोर्ड ने किसानों से उनके सुझाव भी जाने। यह भी पूछा कि सड़क और ग्रीन बेल्ट की जमीन चाहिए तो वह कैसे लें, इस पर जमीन मालिकों ने कहा कि आप लैंड पुलिंग का सिस्टम लाइए।