इंदौर. हाल ही में चुने गए 27 विधायकों के निर्वाचन को अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। इनमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय व यशोधराराजे सिंधिया के अलावा पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी शामिल हैं। अधिकतर याचिकाएं हारे हुए उम्मीदवारों ने दायर की। इनमें मतदाताओं को रुपए बांटने से लेकर हलफनामे में गलत जानकारी देने तक का आरोप लगाया गया।
सभी याचिकाएं फिलहाल चीफ जस्टिस के पास हैं। वे इन्हें इंदौर, जबलपुर व ग्वालियर खंडपीठों में स्थानांतरित करेंगे। इसके बाद सुनवाई शुरू होगी। अधिवक्ता मनीष यादव के मुताबिक चार उम्मीदवारों के खिलाफ दो-दो याचिकाएं दायर की गईं, इसलिए याचिकाओं की कुल संख्या 32 है।
किसके खिलाफ, किस आधार पर याचिका
कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ अंतरसिंह दरबार ने
आधार- मोहर्रम के कार्यक्रम में ट्राफियां बांट आचार संहिता का उल्लंघन किया। तिलक लगाने के बहाने साथियों ने पैसे बांटे।
चैतन्य काश्यप के खिलाफ पारस सकलेचा ने
आधार: जिला प्रशासन ने जिताने के लिए परदे के पीछे से मदद की और मेरे खिलाफ सांप्रदायिकता भड़काने के प्रयास का केस कायम किया। इनके खिलाफ धारा 420 का केस दर्ज है किंतु नामांकन के साथ शपथ पत्र में यह बात छिपाई गई।
रंजना बघेल के खिलाफ निरंजन डाबर ने
आधार : चुनाव के दौरान पैसे और बर्तन बांटे। पैसे बांटने का दृश्य एक कांस्टेबल ने मोबाइल में कैद किया तो मोबाइल छीनकर फेंक दिया और कांस्टेबल को धक्का दिया।
नीना वर्मा के खिलाफ सुरेशचंद्र भंडारी ने
आधार: नामांकन पत्र के साथ संलग्न शपथ-पत्र में कई कॉलम खाली छोड़ जानकारी छिपाई और स्पष्ट कारण भी नहीं बताया।