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कमाई दो रुपए... पैरों से है लाचार, आज करते हैं दूसरो के सपने साकार

8 वर्ष पहले
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इंदौर। उसके पैर भले ही हिल भी ना पाते हों लेकिन हौसला ऐसा कि पहाड़ भी हिला दे। किसी समय दो रुपए घंटे की नौकरी कर सिर्फ एक वक्त पेट भर पाने वाला नि:शक्त नौजवान आज अपने जैसे 16 लोगों को रोजगार दे चुका है। उसने बुधवार को आठ और नि:शक्तजनों को नौकरी दी। अब वह 150 को रोजगार देने की योजना बना रहा है।

हिम्मत से जिन्दगी की तस्वीर बदल देने वाली यह कहानी है मूलत: मक्सी के रहने वाले 35 वर्षीय दशरथराज चौहान की। वे इंदौर की स्कीम 140 में रहते हैं। जिला प्रशासन द्वारा गांधी हॉल में आयोजित निशक्तजन रोजगार मेले में उन्होंने निशक्तजनों को रोजगार देने के लिए स्टॉल लगाया।

चौहान ने बताया उनके माता-पिता मजदूरी करते थे और तीन छोटी बहनें और एक भाई था। पांच साल की उम्र में पोलियो के कारण पैरों ने काम करना बंद कर दिया था। विकलांग होने के कारण 15 की उम्र में जब उन्हें उनके परिजन एक शादी में नहीं ले जा रहे थे तो नाराज होकर घर छोड़ जयपुर चले गए।

वहां से भोपाल पहुंचे। घर वाले उन्हें ढूंढते हुए गए और फिर घर ले आए लेकिन उनका मन नहीं लगा। 1997 में इंदौर में रहने वाले एक रिश्तेदार ने उनका एडमिशन परदेशीपुरा स्थित राजकीय प्रौढ़, मूक-बधिर प्रशिक्षण केंद्र में करवा दिया। यहां दो साल तक बुक बाइंडिंग की ट्रेनिंग लेने के बाद वे नौकरी की तलाश में निकल पड़े।