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डाउनलोड करेंइंदौर. शहरी सीमा में शामिल किए गए 29 गांवों को लेकर हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका की सुनवाई गुरुवार को हुई। कोर्ट ने शासन-प्रशासन के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान मौजूद कलेक्टर आकाश त्रिपाठी और नगरीय प्रशासन विभाग के अवर सचिव आरएस वर्मा से कोर्ट ने कहा- यह क्या तरीका है काम का? जब तक अफसरों को कोर्ट में तलब नहीं किया जाएगा, तब तक क्या जवाब पेश नहीं होगा? कई बार सुनवाई हो चुकी है। जवाब ही नहीं आ रहा।
जस्टिस शांतनु केमकर और मूलचंद गर्ग की डबल बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा- गांवों को शामिल करना एक संवैधानिक प्रक्रिया है, प्रशासन के जिम्मेदार अफसर इसे सामान्य तरीके से ले रहे हैं। माना कि यह शासन के आदेश पर हो रहा है, लेकिन प्रशासन नियम-कायदों की अवहेलना कर काम नहीं कर सकता। आपने (शासन-प्रशासन) गांव शामिल करने में क्या प्रक्रिया अपनाई। इसका मूल रिकॉर्ड लेकर 3 फरवरी को फिर इसी कोर्ट में आइए। पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट की डबल बेंच ने कलेक्टर, नगरीय प्रशासन विभाग के उपसचिव और प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने के आदेश दिए थे। उपसचिव के अवकाश पर रहने के कारण अवर सचिव आए। प्रमुख सचिव ने नहीं आ पाने के लिए अर्जी पहले ही दे दी थी।
एडवोकेट अनिल त्रिवेदी ने यह याचिका दायर की है। उन्होंने कहा- इतना बड़ा काम सरकार ने कर लिया, लेकिन धारा 405 (3) के तहत नोटिफिकेशन ही नहीं किया गया। ग्रामीणों ने जो आपत्तियां दर्ज कराई थीं, उनका निराकरण ही नहीं किया। आपत्तियों पर क्या निर्णय लिया, यह भी किसी को नहीं पता। बहरहाल कोर्ट का सख्त रवैया देख शासन की तरफ से जवाब पेश किया गया। निगम मामले में पहले ही जवाब दे चुका है। निगम ने जवाब में लिखा- हमने केवल गांव शामिल करने का प्रस्ताव दिया था। इस पर अमल शासन ने किया।
यह है मूल रिकॉर्ड में
हाई कोर्ट 3 फरवरी को शहरी सीमा में 29 गांवों को शामिल करने के मूल रिकॉर्ड देखेगी। उनमें ग्रामीणों की आपत्तियां और प्रशासन द्वारा उन पर किए गए फैसलों का उल्लेख है। सुनवाई करने के बाद ये आपत्तियां शासन को भेज दी गई थीं।
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