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डाउनलोड करेंइंदौर/उज्जैन. लोकायुक्त टीम ने इंदौर और उज्जैन में अलग-अलग छापामार कार्रवाई की। अब तक की नौकरी में कुल जमा 70 लाख रु. वेतन पाने वाले इंदौर के उप श्रमायुक्त के यहां तीन करोड़ से अधिक की संपत्ति मिली। उज्जैन में जिला अन्त्यावसायी विकास निगम के अफसर के घर 4 करोड़ की संपत्ति मिली, जबकि उसकी अब तक की कमाई मात्र 25 लाख रु. हैं।
लोकायुक्त पुलिस इंदौर ने गुरुवार को प्रदेश के उप श्रमायुक्त लक्ष्मीप्रसाद पाठक के यहां छापा मारा। टीम ने पाठक के मोती बंगला स्थित कार्यालय सहित डॉक्टर्स कॉलोनी स्थित निवास, पिगडंबर एवं सिंगरौली के ठिकानों पर कार्रवाईकी। सिंगरौली व इंदौर में कार्रवाई जारी है। संपत्ति की कीमत चार करोड़ रुपए तक जा सकती है।
पाठक ग्वालियर में सहायक श्रमायुक्त रहते हुए वर्ष 1998 में रिश्वत लेते भी पकड़े जा चुके हैं। पदोन्नत होकर वे इंदौर में गत 11-12 साल से उप श्रमायुक्त हैं। उनका कार्यालय मोती बंगला में है। यहीं लोकायुक्त पुलिस का भी कार्यालय है। पाठक राज्य कर्मचारी बीमा निगम अस्पताल परिसर में डॉक्टर कॉलोनी में एफ-4 बंगले में रहते हैं।
सुबह पौने छह बजे लोकायुक्त एसपी वीरेंद्रकुमार सिंह के नेतृत्व में डीएसपी, निरीक्षक व अन्य पुलिसकर्मियों की टीम बंगले पर पहुंची। बेल बजाने पर घर में सो रहे पाठक दरवाजा खोलकर बाहर आए तो लोकायुक्त पुलिस को देखकर भौंचक रह गए। घर में उनकी पत्नी, मां, दो बेटे-बेटी व भतीजा था। दल ने घर की तलाशी लेने की बात कही जिस पर वे सहयोग के लिए राजी हो गए। कार्रवाई दोपहर करीब तीन बजे तक चली। इस दौरान अन्य टीमों ने पाठक के राऊ के पास पिगडंबर और सिंगरौली जिले के चंद्रवार स्थित ठिकानों पर छापे मारे।
वेतन से कई गुना अधिक मिली संपत्ति
एसपी लोकायुक्त के मुताबिक पाठक की तनख्वाह हर माह 75 से 80 हजार रुपए महीना है। 30 साल में समय-समय पर मिलने व बढऩे वाले वेतन के आकलन के अनुसार अब तक अर्जित संपत्ति लगभग 70 लाख रुपए होना चाहिए, किंतु तीन करोड़ से अधिक की निकली।
सिंगरौली में और मिली जमीन, बीसीएम हाइट्स के फ्लैट की जांच बाकी
पाठक के घर पर छापे में सिंगरौली के चंद्रवार में संपत्ति होने के अलावा एक भूखंड व एक एकड़ जमीन और मिली है जिनकी कीमतों का आकलन किया जाएगा। जमीन पाठक के पुत्र के नाम पर है। बीसीएम हाइट्स में फ्लैट फर्निश्ड है और उस पर ताला लगा है। किराएदार के आने पर छानबीन होने के बाद अंदर रखे सामान की कीमत का पता चल सकेगा।
कार्यालय व लॉकर में कुछ नहीं मिला
जांच में पाठक का आईसीआईसीआई बैंक में लॉकर मिला। दोपहर में टीम ने बैंक जाकर जांच की तो लॉकर में कुछ नहीं मिला। शहर की सभी बैंकों को पत्र लिखकर पाठक के खाते और लॉकर की जानकारी मांगी गई है। दल ने पाठक के कार्यालय की भी तलाशी ली।
पूरे प्रदेश के उद्योगों पर नियंत्रण
प्रदेश के श्रम आयुक्त का मुख्यालय मोती बंगला परिसर इंदौर में है। यहां श्रमायुक्त आईएएस होता है और चार उप श्रमायुक्त। उन्हीं में से एक उपायुक्त पाठक हैं। हर उपायुक्त के पास अलग-अलग जिम्मेदारी होती है। पाठक के पास फिलहाल औद्योगिक श्रम कल्याण संबंधित सेक्शन है। वे प्रदेश के सभी कारखाने व उद्योगों में मजदूरों, कर्मचारियों, अधिकारियों के कल्याण संबंधित मामले देखते हैं।
कर्मचारी संगठन अधिकारों को लेकर कोई मांग करते थे तो पाठक ही उस पर कंपनियों को निर्देश जारी करते थे। छोटे-बड़े उद्योगों के मालिक सीधे पाठक के संपर्क में रहते थे। कर्मचारियों को सुविधा, सुरक्षा देने के नाम पर कंपनियां कागजी खानापूर्ति करती हैं। इस पर मुहर विभाग ही लगाता है।
अध्यापक से प्रथम श्रेणी अफसर बने
पाठक वर्ष 1985 में मप्र लोक सेवा आयोग से सहायक श्रमायुक्त पद पर पदस्थ हुए थे। उससे पूर्व वे अध्यापक थे और सात साल तक अध्यापन किया। लगभग 29 वर्ष की नौकरी कर चुके हैं। फिलहाल प्रथम श्रेणी अधिकारी हैं और सालों से इंदौर में पदस्थ हैं।
संपत्ति मैंने नहीं खरीदी, पैतृक है-पाठक
उप श्रमायुक्त पाठक ने भास्कर से कहा कि सभी जमीन मेरे नाम पर नहीं है। एक जमीन मेरे पिताजी ने निधन के पहले मेरे नाम की थी। पैतृक गांव में मंदिर भाइयों ने जन सहयोग से चंदा एकत्रित कर बनाया है। मेरी पत्नी के नाम की जमीन मेरे ससुर ने वसीयत करके दी है। केवल एक प्लॉट खरीदा वह भी मप्र शासन की अनुमति के बाद। इसकी जानकारी वेबसाइट पर डाल दी गई और आयकर विभाग को भी सूचित किया। जहां तक पुत्र की संपत्ति का सवाल है, वह उसकी है क्योंकि वह खुद नौकरी करता है। सारी जानकारी देने के बावजूद लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई की।
उप श्रमायुक्त के यहां यह मिला
: अपोलो टाउन कॉलोनी में ४००० वर्गफीट का प्लॉट, पिगडंबर राऊ में 24 सौ वर्गफीट के प्लॉट पर दो मंजिला मकान।
: न्याय नगर में एक भूखंड, बीसीएम हाइट्स में एक फ्लैट, सैटेलाइट एन्क्लेव और एक अन्य कॉलोनी में प्लॉट।
: देवसर सिंगरौली में 43 सौ वर्गफीट का प्लॉट
: सिंगरौली जिले में ही 40 एकड़ कृषि भूमि।
: इंदौर में विभिन्न बैंकों में जमा 14 लाख रुपए।
: बीमा पॉलिसियों में निवेश 16 लाख रुपए।
: विभिन्न बांड्स दो लाख रुपए, बच्चों की शिक्षा पर खर्च 26 लाख रुपए, एक फोर्ड आइकॉन कार, दो स्कूटी, घरेलू सामान टीवी, फ्रिज, कीमती फर्नीचर आदि कीमत 21 लाख रुपए।
: आभूषण- 525 ग्राम सोने व 11 किलो चांदी के जेवर व नकद एक लाख 70 हजार रुपए।
रायकवार की अब तक की आय मात्र 25 लाख
उज्जैन में लोकायुक्त टीम ने गुरुवार तड़के शाजापुर जिला अन्त्यावसायी विकास निगम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी काशीराम रायकवार के घर भी छापा मारा। तलाशी में उनके घर से नकदी, आभूषण व चल-अचल संपत्ति सहित करीब 4 करोड़ की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं। अफसर पर अनुपातहीन संपत्ति की कार्रवाई की गई है। लोकायुक्त एसपी अरुण मिश्र ने बताया कि वर्ष 2011 में रिश्वत लेते पकड़ाने पर विभाग ने उन्हें उज्जैन कार्यालय में अटैच कर रखा है। मालूम पड़ा था रायकवार को 31 साल की नौकरी में 25 लाख रुपए वेतन मिला है। आय के अन्य स्रोत नहीं होने के बावजूद उनके पास बेहिसाब संपत्ति है। पुख्ता जानकारी के बाद निरीक्षक बसंत श्रीवास्तव ने टीम के साथ छापा मारा।
तलाशी में उनके घर से सोने-चांदी के जेवरात, नकदी, लाखों का बैंक बैलेंस, 20 लाख की पॉलिसी, मकान, दुकान, प्लाट, डेयरी फार्म, टू और फोर व्हीलर वाहन मिले हैं। मामले में रायकवार पर भ्रष्टाचार अधिनियम में प्रकरण दर्ज किया है।
अन्त्यावसायी विकास निगम के सीईओ के यहां यह मिला
नकद राशि 35 हजार रुपए
सोने के जेवरात 420 ग्राम
चांदी के जेवरात 2.10 किलो
बैंक बैलेंस 10 लाख रुपए
प्लॉट 11 देवास-उज्जैन में
मकान 6 उज्जैन-भोपाल में
कृषि भूमि 20 बीघा देवास-उज्जैन
बीमा पॉलिसी 20 लाख रुपए
फोर व्हीलर 2 कार व टेंपो
टू व्हीलर 4 स्कूटी व बाइक
दूध डेयरी फार्म 6 लाख की छह भैंस
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