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डाउनलोड करेंबुरहानपुर। दुष्कर्म के झूठे आरोप में डीएनए टेस्ट से निर्दोष साबित हुए जनशिक्षक को शुक्रवार को सवा लाख रुपए दिए गए। यह राशि एससी-एसटी एक्ट के प्रावधान के तहत दी गई। यह अपनी तरह का पहला मामला है।
षड्यंत्र रचने वाली महिला, उसके जेठ व भाई के खिलाफ पुलिस पहले ही केस दर्ज कर चुकी है। मामले में ट्रायल भी शुरू हो चुका है। यदि दोषी महिला को कोर्ट से सजा होती है तो जनशिक्षक को एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के तहत फिर सवा लाख रुपए मिलेंगे।
खकनार थाना टीआई संजीव नयन शर्मा ने बताया- परेठा निवासी जनशिक्षक रामलाल अखंडे के खिलाफ गांव की वैजयंतीबाई ने दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। डीएनए टेस्ट से यह रिपोर्ट झूठी साबित हुई। इस आधार पर जनशिक्षक और उसके एक साथी को बेकसूर करार दिया गया। शुक्रवार को जनशिक्षक को चेक सौंपा गया। एसपी अविनाश शर्मा के मुताबिक यह अपनी तरह का अलग मामला है।
बनाई थी कहानी, बिखेरे थे सबूत : वैजयंतीबाई ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने से पहले झूठी कहानी गढ़ी थी। यही नहीं उसने घर के कमरे में बलात्कार के तमाम सबूत बिखेरे थे। यहां चूडिय़ां तोड़कर फेंकी गई थीं। दूसरे दिन सुबह वह बलात्कार की शिकायत लेकर थाने पहुंची। उसने बताया- मैं रात में लघुशंका के लिए उठी। इसी दौरान जनशिक्षक और उसका साथी संतोष घर में घुस आए और दुष्कर्म किया।
बुरहानपुर का मामला
खकनार थाना अंतर्गत परेठा में २० जनवरी १३ को महिला ने जनशिक्षक रामलाल पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पुलिस ने जनशिक्षक व उसके साथी संतोषी श्रीवास के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की। घटना से एक महीने पहले महिला के पति मनोज यदुवंशी ने जनशिक्षक की १४ साल की भतीजी के साथ ज्यादती की थी। इसके तहत वह जेल में है। पुलिस ने इस बिंदू को ध्यान में रखा और पड़ताल की। जनशिक्षक के लड का नमूना लेकर डीएनए टेस्ट के लिए एफएसएल लैब सागर भेजा गया। यहां से १५ दिन में आई रिपोर्ट ने जनशिक्षक को बेकसूर करार दिया।
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