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फर्जी तरीके से स्कूलों की मान्यता का नवीनीकरण

7 वर्ष पहले
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इंदौर. स्कूलों का न निरीक्षण हुआ और न ही अनुशंसा, लेकिन माध्यमिक शिक्षा मंडल के इंदौर स्थित आंचलिक कार्यालय के कुछ कर्मचारियों ने कागजों में हेराफेरी कर हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों की मान्यता बढ़ा दी। मंडल द्वारा कराई जा रही जांच में इसका खुलासा हुआ है। अब तक छह स्कूलों की गड़बड़ी सामने आई है। मंडल के अफसरों को आशंका है कि इस तरह के और भी मामले हो सकते हैं।

लोकायुक्त पुलिस भोपाल को शिकायत हुई थी कि जिन स्कूलों की मान्यता वर्ष 2011 में खत्म हो जाना थी, उनकी फाइल में कांट-छांट कर फर्जी तरीके से उनकी मान्यता का नवीनीकरण वर्ष 2012 या 2013 तक कर दिया। लोकायुक्त पुलिस ने जांच के लिए जानकारी मांगी तो मंडल ने कमेटी गठित कर अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी। कमेटी तीन साल का रिकॉर्ड खंगाल रही है। इसके लिए इंदौर से जिले के करीब 400 स्कूलों की फाइलों की कॉपी भोपाल बुलवाई गई। छह स्कूलों की फाइलों में गड़बड़ी पकड़ में आ चुकी है। इस मामले में कमेटी ने आंचलिक कार्यालय के कर्मचारी नरेंद्र जोशी, विशाल शर्मा से जवाब तलब किया। ये छह स्कूल कौन-से हैं, इसको लेकर आंचलिक कार्यालय के अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे है। मंडल के आंचलिक अधिकारी बेला देवर्षि शुक्ला ने इतना ही कहा कि बोर्ड ऑफिस भोपाल से स्कूलों की मान्यता नवीनीकरण संबंधी जानकारी मांगी थी, वह हमने भिजवा दी है।

कर्मचारियों ने कहा - हमने नहीं की ओवरराइटिंग : जांच अधिकारी बनाए अजय कुमार कश्यप का कहना है छह स्कूलों की फाइल में ओवरराइटिंग मिली है। इस मामले में तीन कर्मचारियों से लिखित में जवाब लिया गया। कर्मचारियों ने कहा- फाइल में उन्होंने कोई ओवरराइटिंग नहीं की। किसने किया, उन्हें कोई जानकारी नहीं है। किन स्कूलों में यह गड़बड़ी हुई, इसकी जानकारी हमें नहीं है।

निरीक्षण के बाद ही दी जाती है मान्यता

स्कूलों की मान्यता नवीनीकरण और अपग्रेड के लिए डीईओ के माध्यम से अनुशंसा बोर्ड ऑफिस में आती है। कलेक्टर द्वारा इसका निरीक्षण करवाया जाता है। बाद में आंचलिक कार्यालय से यह फाइल भोपाल स्थित बोर्ड ऑफिस जाती है। वहां से स्वीकृति मिलती है। बाद में यह फाइल मंडल के आंचलिक कार्यालय इंदौर में ही रहती है।

जांच कर रही कमेटी

॥मान्यता नवीनीकरण में गड़बड़ी संबंधी शिकायत हुई थी। लोकायुक्त, भोपाल ने जानकारी मांगी थी। वह जानकारी दे दी। कमेटी भी बना दी है जो तीन साल (वर्ष 2009 से 2012) तक के मान्यता संबंधी दस्तावेजों की जांच कर रही है।
- एन.पी. नामदेव, एडिशनल सेक्रेटरी, माध्यमिक शिक्षा मंडल, भोपाल