इंदौर. हाई कोर्ट के निर्देश पर 72 घंटे तक चली कार्रवाई में पिछले दिनों जो अवैध होर्डिंग हटाए गए उसकी रिपोर्ट सरकार ने कोर्ट में पेश कर दी है। इसमें चौंकाने वाले आंकड़े इंदौर जिले से भेजे गए हैं। रिपोर्ट को सही मानें तो प्रदेश में सबसे ज्यादा 2250 होर्डिंग इंदौर, महू, मानपुर सहित नौ नगरीय निकायों से हटाए गए हैं। जिले में कुल 23 हजार 333 वर्गफीट एरिया खाली करवाया गया।
सरकारी रिपोर्ट के बड़े झूठ का सच इस बात से भी सामने आता है कि 23 हजार 333 वर्गफीट को 2250 से भाग दें तो एक होर्डिंग 10 वर्गफीट से ज्यादा का नहीं हो सकता, जबकि शहर में 100 से 200 वर्गफीट के होर्डिंग लगे हैं। सोमवार को इस मामले में जबलपुर हाई कोर्ट में फिर सुनवाई होगी। सूत्रों की मानें तो यही सच्चाई याचिकाकर्ता कोर्ट में भी पेश करने वाले हैं।
सरकार भी मान चुकी है होर्डिंग से है नुकसान- साल 2008 में तत्कालीन प्रमुख सचिव राघव चंद्रा ने सभी निकायों के लिए मानक तय किए थे। इसके मुताबिक प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में सड़क किनारे जो होर्डिंग लगाए जा रहे हैं, उसके दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। ऐसे विज्ञापन होर्डिंग, बोर्ड आवागमन और आवासीय भवनों के लिए असुरक्षित होने के साथ-साथ शहरों की बसाहट, पर्यावरण व सुंदरता को भी प्रभावित करते हैं।
ऐसे मिलती है अनुमति
>निकाय स्तर पर एक समिति इनकी मंजूरी देगी। >इंदौर सहित पांच प्रमुख शहरों में जमीन की सतह से कम से कम 20 फीट की ऊंचाई पर होर्डिंग होगा।
>ऐसे स्थानों पर होर्डिंग नहीं लगेंगे जहां हरियाली, प्राकृतिक परिदृश्य अथवा पुरातात्विक महत्व के भवनों की दृश्यता खत्म हो। >होर्डिंग के लिए स्ट्रक्चरल इंजीनियर का प्रमाण पत्र जरूरी है।
>बहुमंजिला भवनों की छत पर लगने वाला होर्डिंग छत के कुल क्षेत्रफल के 10 प्रतिशत से अधिक न हो।
जानकारी मेरे पास नहीं है
हमने 72 घंटे लगातार कार्रवाई कर अपनी रिपोर्ट भेज दी है। आंकड़े की जानकारी मेरे पास नहीं है।''
-राकेश सिंह, निगमायुक्त