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मां की हिम्मत के हागे हार गई मासूम की जिन्दगी, ट्रक के नीचे आकर तोड़ा दम

8 वर्ष पहले
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इंदौर। एक मां ने ट्रक की चपेट में आई अपनी पांच साल की मासूम बेटी को बचाने के लिए जान की बाजी लगा दी और हिम्मत दिखाते हुए खुद ही अस्पताल भी ले गई, लेकिन होनी को यह मंजूर नहीं था। डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद बच्ची को बचाया नहीं जा सका।

हादसे का शिकार हुई मूसाखेड़ी की अजयबाग कॉलोनी में रहने वाली मासूम नियति शर्मा। नियति की मां पारूल निजी कंपनी में बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर हैं। वे मंगलवार रात नियति को लेकर स्टाफ के लोगों के साथ एक सहकर्मी की शादी में पालदा जा रही थीं।

मां-बेटी स्कूटी पर थीं, जबकि बाकी लोग अपनी-अपनी गाडिय़ों पर थे। पालदा से पहले तीन इमली चौराहे पर पीछे से आए ट्रक ने उन्हें ओवरटेक किया और ट्रक वाले ने गाड़ी बायीं तरफ दबा दी। टक्कर लगने से पारूल का संतुलन बिगड़ा। वे बायीं तरफ गिरीं, जबकि नियति दायीं ओर। ट्रक की गति कम थी, फिर भी वह रुका नहीं और पहिया नियति के बायें पैर के ऊपरी हिस्से से पेट पर चढऩे लगा।

फुर्ती दिखाई लेकिन...

बेटी पर ट्रक का पहिया चढ़ता देख पारूल ने फुर्ती दिखाते हुए चंद पलों में न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि नियति को अपनी तरफ खींच लिया। नियति के हटते ही कुछ दूर जाकर ट्रक वाले ने गाड़ी रोकी। पेट के एक हिस्से पर पहिया चढऩे के दर्द से नियति बेहोश हो गई। पारूल उसे साथियों की मदद से निजी अस्पताल लेकर दौड़ीं। वहां पर पारूल के पिता राजेश शर्मा, बड़े पापा सुरेश शर्मा व अन्य रिश्तेदार पहुंचे।

डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया तो पता चला नियति के आर्गन (अंदरूनी अंग) फट गए हैं, जिससे शरीर के अंदर रक्तस्राव शुरू हो गया है। आधे घंटे बाद नियति ने दम तोड़ दिया।

बार-बार बेटी को पुकार रही मां- सुरेश ने बताया राजेश निजी कंपनी में एरिया मैनेजर हैं। नियति से बड़ी बहन हर्षिता है। नियति को बार-बार याद कर बदहवास हो रही मां को परिजन ने जैसे-तैसे संभाला। संयोगितागंज पुलिस ने बुधवार को नियति के शव का पोस्टमॉर्टम कराया। ट्रक जब्त कर लिया गया है।