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PHOTOS: स्मृति नाट्य समारोह में हुआ म्हैं और शेक चिल्ली का मंचन

7 वर्ष पहले
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इंदौर. संस्था सूत्रधार द्वारा आयोजित नाटकों के तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन दो नाटक मंचित किए गए।
पहला नाटक : राजन देशमुख जैसे वरिष्ठ, गंभीर और सफल निर्देशक की प्रस्तुति हो तो मंचन को लेकर दर्शकों की उम्मीदें बढ़ जाती हैं। मगर संस्था अविरत द्वारा उनके निर्देशन में खेला गया ‘म्हैं’ नाटक निराश कर गया। चिंटू और मिंटू नाम के दो चोरों को लचर कानून व्यवस्था किस तरह सजा की जगह पुरस्कार का हकदार बना देती है, रमेश पंवार लिखित और राजन देशमुख द्वारा अनुवादित नाटक में यही प्रदर्शित करने की कोशिश की गई है।
अमेय नेमावरकर (मिंटू), वैभव खड़ावरेकर (चिंटू, वकील) और रवींद्र डाबे (पुलिस, सायकलवाला, कारवाला) प्रभावित नहीं कर पाते। केवल जज की भूमिका में नितिन बेदरकर कुछ सफल हैं। ‘म्हैं’ अर्थात बकरी का मिमियाना शीर्षक कथा वस्तु से मेल नहीं खाता।
तारीफ के लायक केवल एक ही बात कि प्रस्तुति में किसी भी तरह की मंच सामग्री का प्रयोग नहीं किया गया है। माइम की अवधारणा व औचित्य, अभिनय, हास्य-व्यंग्य के अवसर, संपादन, प्रभाव, संदेश अर्थात सभी स्तरों पर निर्देशक से बहुत ज्यादा काम यह नाटक मांग रहा है।
दूसरा नाटक : हमारी लोककथाओं, कहानी-किस्सों की परंपरा और कहावतों का मशहूर किरदार रहा है शेख चिल्ली। हवा में महल खड़े करने वाले उसके कई ख्वाबों और विभिन्न ऊलजुलूल हरकतों को नाटक के रूप में संजोया है निर्देशक प्रांजल श्रोत्रिय ने ‘शेखचिल्ली’ में। कथा वस्तु मनोरंजक भी है और सीख देने वाली भी शेखचिल्ली की कथाओं को मंच पर जीवंत करने वाले कोई दर्जनभर कलाकार अधिकांश किशोर वय में हैं और एक अभिनेता 2-3 भूमिकाएं अदा करता है।
शीर्षक भूमिका में चार अलग-अलग कलाकार- प्रगल्भ श्रोत्रिय, शाकिर हुसैन, विकी यादव और आनंद जादोलिया उम्दा अभिनय करते हैं। मनोज देवरे (काजी साहब और मौलवी साहब) तथा एक से अधिक किरदारों में श्रवण गढ़वाल व रूपेश नामदेव असरदार हैं।