मुंबई में हुए 4 ऑपरेशन
सिमरन से समर बनने तक का सफ़र आसान नहीं था। उसका मुंबई के लीलावती अस्पताल में चार बार इलाज हुआ। चार ऑपरेशन के बाद वो सिमरन से समर बन गया। पहले तो उसे माता-पिता से बात करने में उसे थोड़ा अटपटा लगा। बाद में वे ऑपरेशन करवाने के लिए राजी हो गए।ऑपरेशन में लगभग 40 लाख रुपए लगे और डेढ़ साल ट्रीटमेंट चला। मां अनीता और सरदार सिंह मुजाल्दे ने बेटी का सपनों का पूरा साथ दिया।
रिश्तेदारों को भेजा बुलावा
मुजाल्दे परिवार में अब बेटा भी है। यह बात दुनिया को भी पता लग सके, जिसके लिए सिमरन का नामकरण धूमधाम से करने का निर्णय किया गया। रिश्तेदारों को बुलावा भेजा गया। कार्ड छपवाए। पुत्र प्राप्ति के जश्न की तारीख 14 दिसंबर तय की गई।
भोज और नामकरण
रविवार दोपहर अन्नापूर्ण मंदिर से घोड़े पर बैठाकर समर को भव्य यात्रा के साथ घर लाया गया। बैंडबाजे और पटाखों की गूंज के बीच रिश्तेदारो के साथ मां और बहनों ने जमकर डांस किया। घर में आयोजित उत्सव के बाद सिमरन को समर नाम दिया गया।
2 साल की उम्र में हाव-भाव बदला
12वीं में पढ़ने वाली सिमरन दो साल की उम्र से ही लड़का बनने के लिए बेताब थी। हाव-भाव और व्यवहार बचपन से ही बदल लिया था, जेंडर दो माह पहले बदला। शुभ मुहूर्त में रविवार को जब नामकरण संस्कार किया गया तो समर की खुशी का ठिकाना नहीं था। अन्नपूर्णा से जब बारात की शक्ल में यात्रा निकली तो वह झूम रहा था, नाच रहा था। उसके माता-पिता और बहनें भी खुश थे।
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