इंदौर. ग्रैफिटी। दीवारों को कैनवास की तरह इस्तेमाल कर बनाई जाने वाली भव्य पेंटिंग्स। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ग्रैफिटी पेंटिंग्स के ज़रिए कलाकारों ने जनसाधारण को जागरूक किया। रंगों के माध्यम से कलाकारों ने दमन का विरोध किया और सोशल चेंज लाने में योगदान दिया। इसी आर्ट का इस्तेमाल शहर के कलाकार भी कर रहे हैं।
बच्चों के कमरों में, कॉलेज की दीवारों पर, राेडसाइड वॉल्स पर और अब मॉल्स में भी ग्रैफिटी बनाई जा रही है। कहीं ये पेंटिंग्स इंदौर की
खूबसूरती दिखा रही हैं तो कहीं ट्रैफिक रूल्स फॉलो करने को कह रही हैं। युवा इनसे कनेक्ट हो रहे हैं। हेलमेट पहनकर स्कूटर चलाता व्यक्ति। सर्विस रोड पर वॉक करते लोग। ट्रैफिक नियम समझाता पुलिस जवान। कुछ ऐसे ही जेश्चर्स हैं सी-21 मॉल में बनी ग्रैफिटी पेंटिंग में।
जीएसआईटीएस और आर्ट्स एंड कॉमर्स में भी
स्टूडेंट्स आर्ट के ज़रिए सोशल मैसेज दे रहे हैं। सेव गर्ल चाइल्ड, रेप, दहेज, ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसे मुद्दों पर ग्रैफिटी बना रहे हैं। स्लोगन भी दे रहे हैं। जीएसआईटीएस कैम्पस में स्टूडेंट्स ने बहतरीन ग्रैफिटी बनाई है। आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज की दीवारों पर इंदौर की फेमस प्लेसेस बनी हुई हैं।