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पुलिस में भ्रष्टाचार रोकेगा सॉफ्टवेयर, हर महीने की रिपोर्ट जाएगी आला अफसरों को

8 वर्ष पहले
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इंदौर. सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार में अव्वल माने जाने वाले पुलिस विभाग में अंदरूनी भ्रष्टाचार भी चरम पर है। सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार मनचाही ड्यूटी लगाने को लेकर होता है। खासतौर पर कैदियों की पेशी या थाना क्षेत्र में कमाई वाली जगह पर हर बार चिह्नित पुलिसकर्मियों की ही ड्यूटी लगती है। इस पर नजर रखने के लिए विभाग ने सॉफ्टवेयर बनवाया है। इसी के जरिए ड्यूटी लगेगी और हर महीने रिपोर्ट आला अधिकारियों को जाएगी। इसका ट्रायल डीआरपी लाइन में शुरू भी हो गया है।

सॉफ्टवेयर की सबसे विशेष बात यह है कि इसमें रोटेशन से सभी की ड्यूटी कैदी की पेशी में लगेगी। एक बार सभी स्टाफ के नाम फीड हो गए तो किसकी ड्यूटी कब आएगी यह सॉफ्टवेयर बताएगा। आईजी, डीआईजी और एसपी इसकी ऑनलाइन निगरानी कर सकेंगे। हर महीने इसकी रिपोर्ट जारी होगी। कोई गड़बड़ी हुई तो साफतौर पर पकड़ा जाएगी। कोई सिपाही ड्यूटी पर नहीं आ सका या बीमार पड़ गया तो उसके स्थान पर ड्यूटी तय करने का विशेषाधिकार आरआई (रिजर्व इंस्पेक्टर) को रहेगा।

सफल होने पर थानों में लागू होगा
सॉफ्टवेयर का प्रयोग डीआरपी लाइन में सफल होने पर सभी थानों में शुरू किया जाएगा। सॉफ्टवेयर को थाने की ड्यूटी के हिसाब से अपग्रेड किया जाएगा।

इसलिए पड़ी जरूरत
भू-माफिया बॉबी छाबड़ा जब जेल में था तो अकसर उसकी पेशी के लिए डीआरपी लाइन से चुनिंदा पुलिसकर्मी ही लगाए जाते थे। ऐसे ही कई रसूखदार कैदियों की पेशी के लिए डीआरपी लाइन में सालों से जमे सिपाही ही जाते हैं। वे कैदियों से मोटी राशि लेकर रास्ते में हर तरह की ऐश करवाते और मोबाइल भी उपलब्ध करवाते। सीरियल गैंग रेप के आरोपी सहित कई बड़े मुल्जिम या तो कोर्ट या रास्ते से पुलिस जवान को चकमा देकर भाग निकले। विभागीय जांच में पता चला कि ज्यादातर मामलों में सिपाही की मिलीभगत रही। कैदी भागने के मामले में निलंबित पुलिसकर्मी कुछ समय बाद बहाल हो जाते।

ड्यूटी की लगती है बोली
डीआरपी लाइन में किसी कैदी के साथ कौन सिपाही जाएगा, इसका निर्धारण सामान्य प्रक्रिया दिखता हो लेकिन अंदरूनी कहानी कुछ और है। सिपाहियों ने ही कबूला कि पेशी के लिए बोली लगती है। चाहकर भी अफसर इस भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगा पा रहे थे।

मदद मिलेगी
॥ड्यूटी को लेकर अकसर विवाद और गड़बड़ी की सूचनाएं मिलती थीं। यह समस्या सॉफ्टवेयर से दूर हो जाएगी। फायदा यह रहेगा कि कोई हेरफेर कर मनचाही जगह ड्यूटी नहीं लगवा सकेगा। कभी भी इसकी मॉनिटरिंग की जा सकेगी। ट्रायल रन पूरा होने पर इसे जल्द अमल में लाया जाएगा।
विपिन माहेश्वरी, आईजी