इंदौर. श्रीनगर में तीन साल पहले देशपांडे परिवार की तीन महिलाओं (मां मेघा, बेटी अश्लेषा, नानी रोहिणी) की हत्या करने वाली छात्रा नेहा वर्मा सहित तीन आरोपियों की फांसी हाई कोर्ट ने भी यथावत रखी। हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने आरोपी छात्रा नेहा के संबंध में कहा कि वह खुद भी एक महिला है और तीन महिलाओं को लूटकर उनकी हत्या करने के वक्त भी उसका दिल नहीं पसीजा। ऐसी स्थिति में उसकी सजा कम नहीं की जा सकती।
जस्टिस एसके सेठ, जस्टिस
पीके जायसवाल की डिविजन बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई थी। करीब 68 दिन पहले कोर्ट ने सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। आरोपी नेहा पिता अनिल वर्मा निवासी देवेंद्र नगर, राहुल उर्फ
गोविंदा निवासी घनश्यामदास नगर, मनोज पिता नानूराम अटोदे निवासी विद्या नगर को जिला कोर्ट द्वारा दी गई फांसी की सजा यथावत रखी गई है। नेहा इंदौर की ऐसी पहली महिला है जिसे जिला कोर्ट ने फांसी की सजा दी है।
यह था मामला
आरोपी नेहा ने जून 2011 में एबी रोड के एक माल में मेघा से दोस्ती की थी। उसके गले में सोने का हार, चूड़ी, टॉप्स देखकर वह समझ गई थी कि मेघा अमीर परिवार से है। उसे जान पहचान बढ़ाई और घर आना-जाना शुरू किया। नेहा ने प्रेमी राहुल को इसकी जानकारी दी। राहुल ने देशपांडे परिवार को लूटने के लिए दोस्त मनोज को विश्वास में लिया। 19 जून 2011 उन्होंने तीनों महिलाओं की हत्या कर दी।