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डाउनलोड करेंइंदौर. पीएमटी फर्जीवाड़े की जांच कर रही स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने हाई कोर्ट में दिए एक शपथ पत्र में लिखा है कि धांधली करने वालों का 2012 के पहले का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। व्यावसायिक परीक्षा मंडल से रिकॉर्ड तलब किया था, लेकिन वहां से भी यही लिखकर दिया गया।
एसटीएफ को जब इस फर्जीवाड़े की जांच सौंपी गई थी तो खुलासा हुआ कि यह घोटाला सात-आठ सालों से चल रहा है। एसटीएफ ने कहा था कि जब से घोटाला शुरू हुआ है तब के रिकॉर्ड लेकर जांच की गई। उपमहानिरीक्षक आशीष खरे ने भी 2012 में फर्जी तरीके से पास होने वालों की सूची मिलने की बात कही थी। साथ ही यह भी कहा था कि इसके पहले के पास हुए छात्रों की जानकारी भी मिलने वाली है। 17 जनवरी, २०14 को एसटीएफ ने कोर्ट में शपथ पत्र दिया, जिसके पेज नंबर 9, 10 और 11 में रिकॉर्ड नहीं मिलने की बात कही गई है।
आगे की जांच नहीं कर सकते
एसटीएफ के डीएसपी दिलराज सिंह बघेल के हस्ताक्षर से शपथ पत्र दिया गया है। एसटीएफ ने कोर्ट में साफ कह दिया कि व्यापमं में 2012 के पहले का रिकॉर्ड नहीं है। इस कारण इस मामले में अब आगे की जांच नहीं की जा सकती।
निजी मेडिकल कॉलेजों से लेना-देना नहीं
एसटीएफ ने शपथ पत्र में लिखा है कि निजी मेडिकल वाले एडमिशन की आखिरी तारीख के दिन जो फर्जीवाड़ा करते हैं, वह एसटीएफ की जांच का विषय नहीं है। एसटीएफ जिन मामलों की जांच कर रही है उससे इस विषय का कोई लेना-देना नहीं है।
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