इंदौर. स्कूलों में छात्र-छात्राएं रोज आ रहे लेकिन छात्रवृत्ति के लिए इनके नाम नहीं मिल रहे। नगर निगम ने ऐसा सर्वे किया कि शहरी क्षेत्र के सभी निजी व सरकारी स्कूलों के शिक्षक पोर्टल पर छात्रों के नाम-आईडी नंबर तलाशते हुए थक गए लेकिन नहीं मिल रहे। जिस स्कूल में 100 छात्र हैं वहां बमुश्किल 10-15 के नाम मिल रहे।
नतीजा ये है कि दिसंबर तक मिलने वाली हजारों छात्रवृत्तियां अटकी है। यह कब मिलेगी, किसी को नहीं पता। अन्य शहरों में भी यही स्थिति है। स्कूलों के पास छात्रों की लिस्ट है, इस आधार पर छात्रवृत्ति मिल सकती है लेकिन अधिकारी नहीं मान रहे।
प्रदेश में जुलाई सत्र से समेकित छात्रवृत्ति (एक ही फॉर्म पर सभी तरह की छात्रवृत्ति) योजना शुरू हुई। इसके लिए सर्वे हुआ था। शहरी क्षेत्र में नगर निगम ने जबकि ग्रामीण क्षेत्र में जनपद पंचायत ने घर-घर जाकर सर्वे किया। इसके बाद विद्यार्थी को एसएसएसएम आईडी (समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन आईडी) नंबर दिया गया।
यह पूरी जानकारी एजुकेशन पोर्टल पर अपलोड की गई। शिक्षकों को पोर्टल पर छात्रवृत्ति के फॉर्म पर यह ट्रिपल-एसएम आईडी नंबर लिखना होता है। लेकिन इसमें बड़ी बाधा ये है कि ज्यादातर छात्रों के नाम नहीं मिल रहे तो आईडी नंबर कैसे मिलेंगे।
छात्र बोले- कब मिलेगी छात्रवृत्ति
हर साल अगस्त में कन्या प्रोत्साहन, अक्टूबर में आदिम जाति कल्याण विभाग से, दिसंबर में राज्य छात्रवृत्ति आदि मिल जाती थी, लेकिन इस साल नहीं मिली। उधर, शिक्षक छात्र-छात्राओं को जल्द ही छात्रवृत्ति मिलने का आश्वासन दे रहे हैं जबकि अभी मैपिंग का ही काम पूरा नहीं हुआ। इसके पूरा होते ही अगली प्रक्रिया शुरू होगी।