इंदौर. कॉलेज में स्लीवलेस ड्रेस पहनकर आई तीन छात्राओं को विचित्र सजा भुगतना पड़ी। उन्हें भारतीय संस्कृति पर निबंध लिखना पड़ा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हफ्तेभर पहले कॉलेज के डॉयरेक्टर ने स्लीवलेस ड्रेस पर प्रतिबंध लगा दिया था। खास बात यह कि छात्राओं ने निबंध में तो माना कि ड्रेस वर्क प्लेस और कल्चर के मुताबिक होना चाहिए, लेकिन बाद में दो छात्राओं ने मौखिक विरोध दर्ज करवा दिया।
मामला सोमवार को देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी आईएमएस (इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज) में हुआ। जिन तीन छात्राओं को सजा दी गई उनमें से एक के पिता ने डायरेक्टर को फोन कर इस सजा और फैसले पर सहमति जता दी। हालांकि अन्य छात्राओं ने दबे स्वर में इस प्रतिबंध का विरोध भी शुरू कर दिया है।
कुछ छात्राओं का कहना है कि वे इस प्रतिबंध को नहीं मानेंगी और ज्यादा दबाव डाला गया तो उनके पास दूसरे कॉलेज का विकल्प है। कुछ फैकल्टी भी इस प्रतिबंध के विरोध में हैं लेकिन लिखित आपत्ति कहीं से नहीं आई है। उधर, संस्थान के डायरेक्टर ने कहा है कि वे प्रतिबंध के निर्णय से पीछे हटने वाले नहीं हैं। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया है। कुलसचिव-कुलपति कार्यालय का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी ही नहीं है।
न हमसे पूछा, न कोई जानकारी दी
न तो आईएमएस प्रबंधन ने इस निर्णय को लेकर यहां से कोई अनुमति ली और न हमें कोई जानकारी दी है। कुलपति कार्यालय को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई है।
आर.डी. मूसलगांवकर, कुलसचिव, डीएवीवी
केवल स्लीवलेस ड्रेस पर रोक लगाई
कोई ड्रेस कोड लागू नहीं किया है। केवल छात्राओं के स्लीवलेस ड्रेस पहनकर आने पर रोक लगाई है। तीन छात्राएं स्लीवलेस ड्रेस में आई थीं। उन पर पेनल्टी लगाने के बजाय निबंध लिखने की सजा दी गई। विषय भी अच्छा था। तीनों ने निबंध में माना कि छात्राओं की ड्रेस वर्क प्लेस एंड कल्चर के मुताबिक होना चाहिए।
डॉ. पीएन मिश्रा, डायरेक्टर, आईएमएस