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सुपर कॉरिडोर की 13 हेक्टेयर जमीन छोड़ने पर आईडीए ने ली आपत्ति

8 वर्ष पहले
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इंदौर। सुपर कॉरिडोर के करीब 13 हेक्टेयर जमीन के एक मामले को लेकर इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने आपत्ति ली है। दरअसल, कॉरिडोर की इस जमीन को लेकर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) के आयुक्त सह संचालक द्वारा कुछ जमीन मालिकों के पक्ष में निर्णय कर दिया गया था। आईडीए ने इसी मसले पर राज्य शासन को आपत्ति दर्ज कराते हुए पत्र लिखा है कि सरकार या तो टीएनसीपी के निर्णय पर खुद फैसला ले या हमें इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने की अनुमति दे।

असल में स्कीम की घोषणा होने के बाद कुछ जमीन मालिक नगर तथा ग्राम निवेश के आयुक्त सह संचालक के समक्ष सुनवाई के लिए गए थे। इन लोगों का कहना था जिस जमीन को प्राधिकरण स्कीम में ले रहा है वहां हमारा टीएंडसीपी से नक्शा पास है और डायवर्शन भी किया हुआ है। आयुक्त सह संचालक ने जमीन मालिकों की आपत्ति को सही माना। उधर, आईडीए को आशंका है कि इतनी जमीन हाथ से निकल गई तो न केवल कॉरिडोर की डिजाइन खराब हो जाएगी बल्कि मालिकों द्वारा इस जमीन के अन्य उपयोग से समस्याएं भी खड़ी हो जाएंगी।

इसके बाद प्राधिकरण ने आवास एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव इकबाल सिंह बैस को पत्र लिखा है। प्राधिकरण का मानना है भले ही टीएंडसीपी ने जमीन का नक्शा पास कर दिया हो, डायवर्शन हो गया हो लेकिन मौके पर वो खाली है। इससे लगता है कि जमीन मालिक को फिलहाल इसकी जरूरत नहीं है। यह जमीन स्कीम में सम्मिलित कर अन्य लोगों की तरह इन्हें भी विकसित भूखंड दिया जा सकता है। प्राधिकरण ने इन जमीनों की वीडियो बनाकर भी शासन को भेजी है।

यह होगी परेशानी- ये जमीनें स्कीम 169 ए व 169 बी में आती है। यहां नक्शे में व्यावसायिक भूखंड के लिए जमीन रखी गई है। यदि जमीन मालिकों का कब्जा बना रहता है तो कॉरिडोर में समानता खत्म हो जाएगी यानि कुछ भूखंडों के बीच फॉर्म हाउस या गोदाम आदि बन जाएंगे। सीवरेज व सड़क व्यवस्था भी बिगड़ेगी क्योंकि प्राधिकरण जहां अपने नक्शे में भूखंड छोड़कर बैठा था वहां निजी जमीन मालिक का कब्जा बना रहेगा। ऐसे में नक्शे में बड़े संशोधन करना कठिन हो जाएगा।

अनुमति मिली तो न्यायालय जाएंगे

॥ हमारा आग्रह है शासन इस मामले में निर्णय लें या फिर हमें न्यायालय जाने की अनुमति दें। ये जमीन सुपर कॉरिडोर के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। हम इसे छोडऩा नहीं चाहते। - दीपकसिंह, सीईओ इंदौर विकास प्राधिकरण