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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: अनुदान प्राप्त संस्थानों के शिक्षकों को मिलेगा छठा वेतनमान

8 वर्ष पहले
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इंदौर. सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश के अनुदान प्राप्त स्कूल-कॉलेजों के शिक्षकों को छठा वेतनमान देने का आदेश जारी किया। कोर्ट ने फैसला देते हुए राज्य शासन के सभी तर्कों को खारिज कर दिया। कहा- सन् 2000 के पहले जो शिक्षक-कर्मचारी अनुदान प्राप्त संस्थानों में नियमों के तहत नियुक्त हुए, उन्हें पूरा वेतनमान एरियर के साथ दिया जाए।

कोर्ट के आदेश के बाद राज्य शासन पर करोड़ों रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इससे पहले 12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अनुदान प्राप्त स्कूल-कॉलेजों के शिक्षकों को यह वेतनमान देने पर सहमति जता दी थी।

कोर्ट ने शासन के प्रतिनिधियों को 7 जनवरी को इस आदेश के साथ हाजिर होने को कहा था। अभी तक इन संस्थानों के शिक्षकों-कर्मचारियों को पांचवां और वह भी आधा वेतनमान ही मिल रहा था। खास यह है कि रिटायर शिक्षक-कर्मचारियों को भी इस वेतनमान का लाभ मिलेगा।

शिक्षकों ने कहा- हक की लड़ाई जीते : अनुदान प्राप्त कॉलेजों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने वाले डॉ. कमलेश भंडारी और विपुल पटेल ने कहा- यह शिक्षकों के संघर्ष की जीत है। हम 13 साल से संघर्ष कर रहे थे। मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष बी.एस. यादव और विजय द्विवेदी ने कहा कि सालों से हमें हमारी मेहनत का आधा पैसा भी नहीं मिल रहा था। अब पूरा हक मिल सकेगा। प्राचार्य मंच के अध्यक्ष डॉ. डी.पी. सिंह और मंगल मिश्रा ने शासन से मांग की है कि जल्द इसे अमल में लाया जाए।

पुराना एक्ट, पुराने शिक्षकों पर लागू नहीं

कोर्ट ने कहा- सन 2000 में शासन द्वारा पारित एक्ट गलत है। इसमें कहा गया था कि हर पांच साल में 20-20' कम कर अनुदान खत्म कर देंगे। उस समय जो शिक्षक-कर्मचारी नौकरी पर थे, उन पर वह एक्ट लागू नहीं होगा। उन्हें पूरा वेतनमान मिलना चाहिए। उस समय नियम था कि अनुदान प्राप्त शिक्षकों को सरकारी स्कूल-कॉलेज के शिक्षकों के बराबर वेतनमान मिलना चाहिए।


प्रदेश में किसे फायदा
: 70 कॉलेजों के 1100 शिक्षक और कर्मचारियों को।
: 1300 स्कूलों के 5750 शिक्षक-कर्मचारियों को।


इंदौर में किसे फायदा
: 11 अनुदान प्राप्त कॉलेजों के 200 शिक्षक-कर्मचारियों को।
: 85 अनुदान प्राप्त स्कूलों के 700 शिक्षक-कर्मचारियों को।


फैसला देखने के बाद कुछ कहूंगा

मैंने अभी फैसले की कॉपी नहीं देखी। कॉपी मिलने के बाद ही कुछ कह पाऊंगा।

उमाशंकर गुप्ता, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री