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डाउनलोड करेंइंदौर. ईओडब्ल्यू ने गुरुवार को दो हाउसिंग सोसायटी के अध्यक्षों व अन्य के खिलाफ जिला कोर्ट में चालान पेश किया। इन्होंने हकदार सदस्यों के सात प्लॉट अन्य लोगोंं को बेच दिए थे। चालान पेश होने के तत्काल बाद कोर्ट ने चार आरोपियों को सीधे जेल भेज दिया। आरोपियों में दो महिलाएं भी शामिल हैं।
आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) के विधि अधिकारी आशीष खरे के मुताबिक संस्था विकास अपार्टमेंट के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण व्यास और लवकुश हाउसिंग सोसायटी के अध्यक्ष मनोज कुमार पालीवाल ने मिलकर सात प्लॉट 17 लाख 32 हजार 344 रुपए में बेच दिए थे। ये प्लॉट राजेंद्र जायसवाल, उनकी पत्नी उषा और बेटी नम्रता जायसवाल को बेचे थे। दिलीपसिंह शंकरलाल चौहान ने दस्तावेजों के साथ विभाग को शिकायत की। भोपाल स्थित मुख्यालय में पुष्टि होने के बाद केस दर्ज किया गया। जांच में आरोपी अध्यक्षों के खिलाफ सबूत मिलते गए। कोर्ट ने लक्ष्मीनारायण, राजेंद्र, उषा और नम्रता को कोर्ट से ही जेल भेज दिया। आरोपी मनोज उपस्थित नहीं हुआ। उसने विभाग को पूछताछ में भी सहयोग नहीं किया। कई बार वारंट भेजने के बाद भी जवाब नहीं दिया।
एक ही परिवार को प्लॉट दिए
गुरुवार को जिला न्यायालय में डीएसपी आर.के. सोनकर ने चालान पेश किया। इसमें लिखा है कि आरोपी अध्यक्षों ने प्लॉट बेचने के साक्ष्य भी मिटाने की कोशिश की। सहकारिता विभाग से जो पत्राचार हुआ उसे भी रफा-दफा करने का प्रयास किया। सातों प्लॉट जायसवाल परिवार को बेचे। यह भी पता चला कि जायसवाल परिवार ने व्यास और पालीवाल से मिलकर सदस्यता के फर्जी दस्तावेज तैयार किए। रजिस्ट्री भी फर्जी बनवाई। इन सभी पर धोखाधड़ी करने, षड्यंत्र रचने समेत कई आरोप सिद्ध हुए।
एक महीने में दूसरा चालान
ईओडब्ल्यू ने जिला कोर्ट में इसी महीने में यह दूसरा चालान पेश किया। पहला चालान वेदमाता हाउसिंग सोसायटी के खिलाफ पेश किया था। इसमें संचालक मंडल के सदस्य, सहकारिता विभाग के रिटायर अधिकारी आरोपी बनाए गए थे। सूत्रों के मुताबिक और भी संस्थाओं की जांच पूरी हो चुकी है। इनका चालान भी जल्द पेश किया जाएगा।
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