जहां हादसा हुआ वह हिस्सा प्रभु नगर और सिल्वर ऑक्स कॉलोनी के पास है। वैशाली नगर की तरफ से डंपर रोज यहां ब्रॉड गेज के लिए गिट्टी खाली कर रहे हैं। बुधवार रात को भी डंपर उसी रूट से आया था। बताया जा रहा है कि गिट्टी खाली करते समय डंपर का अगला हिस्सा पटरी की तरफ हो गया था। ट्रेन आने पर संभवत: ड्राइवर घबरा गया और डंपर को कंट्रोल नहीं कर सका।
हादसे के पीछे रेलवे की गंभीर लापरवाही सामने आई
केसरबाग ओवरब्रिज के पास ट्रेन और डंपर की भिड़ंत के पीछे डंपर चालक से ज्यादा लापरवाही रेलवे की सामने आई है। भास्कर ने रेलवे अधिकारियों से इस तरह के निर्माण के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर बात की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। किसी भी सावधानी का पालन नहीं किया जा रहा था।
यह हैं नियम
> कॉशन ऑर्डर जारी होता है।
> वर्क इन प्रोग्रेस के बोर्ड लगाए जाते हैं।
> जहां कार्य होता है, वहां ट्रेनों की स्पीड 15 से 30 किमी प्रतिघंटा तय की जाती है।
> लाल सिग्नल के बोर्ड लगे होने चाहिए।
> रात में दिखाई देने के लिए रेडियम वाले बोर्ड लगते हैं।
> कार्य के दौरान पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए।
> गिट्टी ट्रैक से दूर अनलोड होनी चाहिए।
और ऐसे थे मौके पर हालात
> पटरी के आसपास कोई व्यवस्था नहीं।
> दिनभर ठेले, गाड़ियां और लोग ट्रैक पार करते हैं।
> पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूबा था, डंपर की हेडलाइट भी बंद थी।
> गिट्टी को ट्रैक के इतने पास डाला गया कि कुछ गिट्टी ट्रैक पर भी आ गई।
> न साइन बोर्ड न ही ट्रैक से गाड़ियों को दूर रखने का इंतजाम था।
> ट्रक व अन्य गाड़ियां ट्रेन के पास से निकल रही थीं।
यात्रियों की मदद के लिए आए रहवासी
सिल्वर ऑक्स कॉलोनी में रहने वाली निर्मला शर्मा ने बताया मैं किचन में थी तभी जोरदार धमाके की आवाज आई। मैंने रहवासियों को बताया और हम सभी दौड़कर ट्रेन के पास पहुंचे। जिस बोगी में हादसा हुआ उसमें लगभग 80 यात्री थे। इनमें आजाद नगर के रहने वाले अब्दुल के परिवार के 4-5 लोगों को कांच के टुकड़े लगे थे। वे इतने बदहवास हो चुके थे कि कुछ समझ नहीं आ रहा था। हमने उन्हें अपने घर ले जाकर बैठाया। वैन का इंतजाम कर उन्हें रवाना किया।
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