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ट्रेंचिंग ग्राउंड : धुएं से सांस लेना मुश्किल, बच्चों के साथ बायपास पर उतरे रहवासी

7 वर्ष पहले
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इंदौर. ट्रेंचिंग ग्राउंड में जानबूझकर लगाई जा रही आग के कारण आसपास की कई कॉलोनियों में सांस लेना मुश्किल हो रहा है। धुएं और बदबू से लोगों का स्वास्थ्य तक खराब हो रहा है। रविवार को कालिंदी मिड टाउन, नीलगिरि, दुधिया, देवगुराड़िया के रहवासी बच्चों के साथ सड़क पर उतरे और चक्काजाम कर दिया। लोगों ने कहा- गर्मी में तो हवा के कारण धुआं उड़ जाता था लेकिन कोहरे से धुआं नीचे मंडराता रहता है जिससे आसपास का सारा वातावरण प्रदूषित हो गया है।
बच्चे बोले- क्या हमें बीमार करना चाहते हो?
सड़क पर उतरे बच्चों ने इसके लिए जिम्मेदार अफसरों से सवाल किया कि क्या वे उन्हें बीमार करना चाहते हैं? अगर ऐसा नहीं है तो फिर ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरे का निपटान सही तरीके से क्यों नहीं किया जा रहा है। क्यों जानबूझकर कचरा जलाया जा रहा है?
बड़ों ने कहा- 50 हजार लोगों की सेहत से खिलवाड़
रेलवे अधिकारी अशोक शर्मा, डॉ. तेजस मेहता, संदीप करमबेलकर, नासिर हुसैन, दिनेश शर्मा और अमिताभ चटर्जी ने कहा कि निगम प्रशासन अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहा है। आसपास के 50 हजार से ज्यादा रहवासियों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी भी प्रदर्शन में पहुंचे थे।
...और अफसर का गैर जिम्मेदाराना बयान
ट्रेंचिंग ग्राउंड आज से नहीं, वहां मरे मवेशियों को निपटारा भी पहले से ही हो रहा है ट्रेंचिंग ग्राउंड आज से नहीं बना है। वहां जो कॉलोनियां हैं उनके निर्माण की अनुमति कैसे ली गई, यह देखना चाहिए। मृत पशुओं को उठाने और उनके निपटान का काम इसके बनने के समय से वहीं हो रहा है। ट्रेंचिंग ग्राउंड कैसे हटा सकते हैं। बावजूद रहवासियों को मुख्य परेशानी किस बात से है, चर्चा कर हल निकालेंगे।'
- डॉ. के.एस. वर्मा, मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी