इंदौर . श्वेतांबर जैन समाज की दीक्षार्थी रवीना बोथरा और नेहा डोसी ने शनिवार को सांसारिक जीवन त्यागकर वैराग्य की राह अपना ली। रवीना ने महत्तरापद विभूषिता विनीताश्रीजी व शुभदर्शनाश्रीजी के सान्निध्य में रामबाग स्थित दादावाड़ी में दीक्षा ग्रहण की। वहीं नेहा ने गणिवर्य मेघचंद्र सागर, मुनिराज आनंदचंद्र सागर, साध्वी हेमप्रभाश्रीजी व अनंतनिधिश्रीजी के सान्निध्य में ह्रिंकारगिरि तीर्थ में दीक्षा ग्रहण की।
केशलोच व अन्य रस्में हुईं, जिन शासन की जय जयकार गूंंजी
दादावाड़ी : सैकड़ों समाजजनों की मौजूदगी में हुआ दीक्षा समारोह
श्वेतांबर खरतरगच्छ श्रीसंघ के प्रचार प्रमुख योगेंद्र जैन ने बताया दीक्षार्थी रवीना का नया नाम नूतन साध्वी स्वस्तिप्रज्ञाश्रीजी होगा। विनीताश्रीजी ने कहा- दीक्षा जीवन का उजास है। मोक्ष मार्ग का पथ है। यह हमारे चरित्र को उज्ज्वल और निर्मल करती है। विमलयशाश्रीजी, पदमयशाश्रीजी, जिनाज्ञाश्रीजी, समकितप्रज्ञाश्रीजी सहित सैकड़ों समाजजनों की मौजूदगी में दीक्षार्थी का केशलोचन किया। दीक्षार्थी ने कहा- मैं सांसारिक मार्ग छोड़कर संयम के पथ पर बढ़ रही हूं जिसका सौभाग्य मुझे आज प्राप्त हुआ। जन्म से लेकर आज तक अज्ञानतावश मुझसे कोई गलती हुई हो तो मुझे क्षमा करें।
ह्रिंकारगिरि तीर्थ : पालकी निकली, श्वेत परिधान धारण किए और गूंज उठे जयकारे
नवकार परिवार के प्रवीण गुरु ने बताया दीक्षा उत्सव की शुरुआत स्नात्र पूजन से हुई। शहनाई एवं वाद्य यंत्रों की ध्वनि के बीच भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन बाद फार्म हाउस से नेहा की पालकी निकली। इसमें सज-धजकर विराजित नेहा के सांसारिक जीवन का यह अंतिम शृंगार था। दीक्षा स्थल पहुंचने से पहले पुराने वस्त्र त्यागकर व श्वेत परिधान धारण कर उन्हें केशलोच एवं अन्य रस्मों के लिए एक कक्ष में ले जाया गया। समूचा तीर्थ क्षेत्र जिन शासन की जय जयकार से गूंज उठा। साध्वी हेमप्रभाश्रीजी एवं अनंतनिधिश्रीजी के सान्निध्य में संयमित जीवन स्वीकारने का प्रतीक ओघा उन्हें महाराजश्री ने भेंट किया, वैसे ही वे नाच उठीं। उन्हें नवकार निधि नाम दिया गया।
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