इंदौर. भारतीय डेविस कप टीम के नॉन प्लेइंग कैप्टन आनंद अमृतराज ने कहा है कि वे चीनी ताइपे टीम को हलके में नहीं लेंगे। टाई से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि हमारे चांसेज अच्छे हैं। हमारी टीम मजबूत है और हम मुकाबला जीतेंगे। इस मौके पर सोमदेव देवबर्मन, यूकी भांबरी,
रोहन बोपन्ना और साकेत मेनेनी भी मौजूद थे।
इंदौर टेनिस क्लब में 31 जनवरी से 2 फरवरी तक एशिया-ओसीनिया ग्रुप-1 में भारत और चीनी ताइपे के बीच मुकाबला होगा। पहले दिन सुबह 10 बजे से पहला सिंगल्स मैच होगा। उसके बाद दूसरा सिंगल्स होगा। दूसरे दिन 1 फरवरी को डबल्स के मैच होंगे।
2 फरवरी को रिवर्स सिंगल्स मैच खेले जाएंगे। भारतीय टीम के सोमदेव देवबर्मन ने कहा कि हमारे एकल और युगल दोनों खिलाड़ी अच्छे हैं। चीनी ताइपे के साथ कड़ा मुकाबला होगा। कोर्ट के स्लो होने पर उन्होंने कहा हम इस कोर्ट पर प्रैक्टिस कर रहे हैं। जल्द ही हम इससे तालमेल बिठा लेंगे।
यूकी भांबरी ने कहा एकल में हमारे खिलाड़ी चीनी ताइपे के मुकाबले श्रेष्ठ हैं। इसके साथ ही हमें होम एडवांटेज भी मिलेगा। युगल विशेषज्ञ रोहन बोपन्ना ने मैच की रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि हम एक बार में एक मैच पर ध्यान देंगे। साकेत मेनेनी पहली बार डेविस कप टीम में शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा मुझे एकल या युगल जहां भी मौका दिया जाएगा मैं उसके लिए तैयार हूं।
चीनी ताइपे की टीम के सबसे अहम खिलाड़ी ताई चेन इंदौर पहुंच गए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वे इस बार भारत को कड़ी टक्कर देंगे। दोनों देश इससे पहले 2009 में भिड़े थे जिसमें भारत ने 3-2 से जीत दर्ज की थी। ताई चेन ने कहा भारतीय टीम में सोमदेव, यूकी और रोहन के रूप मे मजबूत खिलाड़ी हैं। हमारे लिए मुकाबला आसान नहीं होगा। चीनी ताइपे टीम के दो खिलाड़ी बुधवार को इंदौर पहुंचेंगे। दोनों टीमों के खिलाडिय़ों ने मंगलवार को जमकर अभ्यास किया। गुरुवार को ड्रॉ सेरेमनी होगी।
वर्ष 1900 में दो देशों के बीच मैच से शुरू हुआ डेविस कप का सफर 130 देशों में पहुंच चुका है। विश्व की सबसे प्राचीन और लोकप्रिय स्पर्धाओं में से एक डेविस कप को इस वर्ष से द वल्र्डकप ऑफ टेनिस के नाम से जाना जाएगा। डेविस कप की शुरुआत हॉवर्ड विश्वविद्यालय टेनिस टीम के उन चार सदस्यों का अहम योगदान रहा जिन्होंने इस आयोजन की कल्पना की थी।
पहला मुकाबला वर्ष 1900 में बोस्टन में अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन के बीच खेला गया था जिसमें अमेरिका ने 3-0 से जीत दर्ज की थी। भारतीय टीम ने पहली बार 1921 में डेविस कप में हिस्सा लिया और अब तक वह तीन बार फाइनल में पहुंची है। 1966 के फाइनल में भारत, ऑस्ट्रेलिया से 4-1 और 1987 में स्वीडन से 5-0 से हार गया था। 1974 में भारत ने रंगभेद नीति के कारण द.अफ्रीका को फाइनल में वॉकओवर दे दिया था।