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सख्ती हुई तो धरने पर बैठ गए सफाईकर्मी, हाई कोर्ट के आदेश का असर नहीं

7 वर्ष पहले
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इंदौर. शहर में सफाई के लिए सख्ती बरतना सफाईकर्मियों को रास नहीं आया। पांच गैर जिम्मेदार दरोगा को सस्पेंड किया तो कर्मचारी नेता तिलमिला उठे। सोमवार को अपने क्षेत्रों में सफाई करने की बजाए निगम परिसर में 350 से ज्यादा सफाईकर्मियों को धरना देने के लिए बुलवा लिया। इस दौरान कचरा उठाने वाली कंपनी एटूजेड और अफसरों पर भड़ास निकाली गई। हालांकि इसके पीछे कहानी दूसरी बताई जा रही है।
निगम में ऐसे कई सफाईकर्मी हैं, जिन्होंने एवजी रखे हैं। ऐसे भी कर्मचारी हैं जो केवल हाजिरी दर्ज कराने जाते हैं और काम किसी दूसरी जगह करते हैं। अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद नहीं होने पर इन्हें अब सस्पेंड किया जा रहा है। इसलिए हड़ताल, धरना, प्रदर्शन का सहारा लेकर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है। अधिकारियों से चर्चा के बाद धरना समाप्त हुआ और दोपहर 12 बजे सफाईकर्मी वापस अपने क्षेत्रों में काम करने लौटे।
महिला कर्मचारियों के फोटो सार्वजनिक करने का विरोध

प्रशासन, नगर निगम ने तय किया है कि महिला कर्मचारियों के फोटो संबंधित क्षेत्रों में सार्वजनिक किए जाएंगे, ताकि इनका कार्य क्षेत्र लोगों को पता चल सके। सफाई नहीं होने पर लोग इन्हें देखकर सफाई के लिए बुलवा सकेंगे। कर्मचारी नेताओं ने सोमवार को इसका विरोध किया।
69 दरोगा, 140 स्थान भी नहीं संभल रहे

कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने पिछले दिनों शहर में नियमित सफाई के लिए 140 प्रमुख स्थान चुने थे। नगर निगम में कुल 3000 नियमित, 2500 अस्थायी सफाईकर्मी हैं और 69 दरोगा। इसका मतलब यह कि हर दरोगा के पास औसत दो स्थान। आसानी से 140 स्थानों पर नियमित सफाई हो सकती है, लेकिन यह भी कर्मचारियों से नहीं हो रहा है। दरोगा, सफाईकर्मियों को इन स्थान पर मौजूद रहना है, लेकिन यहां कचरा भी नहीं उठ रहा।
नौकरी निगम की सफाई मॉल्स में

> हाई कोर्ट की फटकार के पहले तक ऐसी स्थिति थी कि लगभग एक हजार सफाईकर्मियों के एवजी क्षेत्रों में सफाई करने चले जाते थे। जबकि वास्तविक कर्मचारी एबी रोड के मॉल्स, कार्पोरेट दफ्तरों में सफाई के ठेके लेकर वहां सेवाएं दे रहे थे। निगम के ही एक कर्मचारी नेता के मुताबिक सफाईकर्मियों के नाम पर बड़ी धांधली होती है।

> कर्मचारी संगठन के नेताओं ने भी अपने परिजन मस्टरकर्मी के रूप में रखे हैं। ये मस्टरकर्मी केवल हाजिरी लगवाते हैं। सप्ताह में एक-दो दिन ही क्षेत्र में जाते हैं।

> महिला सफाईकर्मियों की भी ऐसी ही स्थिति है। इनके परिजन एवजी को भेजकर क्षेत्र में सफाई करवा देते हैं।
वेतन के बावजूद घरों से वसूली
नगर निगम सफाईकर्मियों को नियमित वेतन दे रहा है, इसके बावजूद घरों से कचरा लेने के एवज में 30 से 50 रुपए तक लिए जा रहे हैं। राजेंद्र नगर, परस्पर नगर, विशाल नगर, मिश्र नगर, सिल्वर ऑक्स कॉलोनी, पलासिया, साकेत, चंद्रलोक, राजमोहल्ला सहित कई कॉलोनियों में रहवासियों से हर महीने पैसे लिए जा रहे हैं।