इंदौर. कचरा, सफाई, आवारा पशुओं और कुत्तों के आंतक जैसे मुद्दों पर हाईकोर्ट की नजर में नगर निगम पूरी तरह नकारा साबित हुआ है। सभी मसलों पर निगम के हाथ से कमान जिला प्रशासन के हाथ में चली गई है। इसके बावजूद निगम अपनी गलती नहीं मान रहा।
मेयर कृष्णमुरारी मोघे ने भास्कर से विस्तृत चर्चा में कहा कि निगम ने काम किया है लेकिन सफाई के मसले पर अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख पाया। आवारा पशुओं की समस्या जरूर सड़कों पर नजर आ रही है, बावजूद हम विशेष अभियान चलाकर अगले एक माह में इससे निपट लेंगे।
सफाई के मुद्दे पर : जनता का सहयोग भी चाहिए
- कोर्ट के मामले में कोई टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन सुविधाएं पहले से बढ़ी हैं।
- चार साल पहले 40 से 42 गाड़ी कचरा उठाने के लिए थी, अब 70 से 80 हो चुकी है। पहले 300 से 400 टन कचरा उठता था। अब 800 से 850 टन उठता है।
- शहर के 140 ऐसे स्थान हमने चिह्नित किए, जिन्हें पूरी तरह कचरा मुक्त किया गया। सुबह की सफाई के अलावा 40 से 50 स्थान तय कर वहां दोपहर में भी कचरा उठवाया गया। कुछ स्थानों पर यह व्यवस्था शाम और रात को भी की गई।
- पहले सफाई कर्मचारी की उपस्थिति 40 प्रतिशत थी, अब 70 प्रतिशत है।
- वार्डों में सफाईकर्मियों की व्यवस्था में गड़बड़ थी, कहीं 20 थे कहीं 150। हमने प्रत्येक वार्ड में कम से कम 50 कर्मचारी की व्यवस्था की।
- सफाई के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाया, जिससे काफी काम हुआ।
- जनता की जागरूकता नहीं होने से भी परेशानी आई।
- पहली बार वार्डों में कचरा कलेक्शन के लिए छोटी गाड़ियां लगाई। हर वार्ड में जेसीबी व दो डंपर दिए। असर भी हुआ, महामारी अब नहीं होती शहर में।
- जिसका नजरिया ही गलत हो, उसका क्या इलाज हो सकता है। अधिकारियों की अपनी सीमा है पक्ष रखने की। कोशिश करेंगे अगली बार निगम का पक्ष मजबूती से रखा जाए।