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महिलाएं आखिर थाने जाने से क्यों डरती हैं..इसके पीछे यह है सच्चाई?

9 वर्ष पहले
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इंदौर। शनिवार का दिन अवेयरनेस और गाइडेंस के साथ गुजरा। शहर में हुए दो कार्यक्रमों में एक तरफ जहां डॉ. वर्तिका नंदा और रश्मि सिंह ने महिलाओं के अधिकारों की बात की। वहीं मीडिया पर्सनालिटी दीपक चौरसिया ने कॅरियर गाइडेंस दिया। लोग एक दिन कोई घटना देखते हैं। उस पर कुछ देर बात करते हैं। अगले दिन से वे अपने सीरियल देखने में व्यस्त हो जाते हैं। बाद में वे उस घटना पर ध्यान नहीं देते। उनमें यह सवाल नहीं उठते कि क्या पीड़ित को इंसाफ मिला? क्या गुनहगार को सजा मिली? लोगों को इस तरह की प्रवृत्ति और महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों पर अपनी चुप्पी तोड़नी होगी। यह कहना था दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज के जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की हेड डॉ. वर्तिका नंदा का। वे प्रेस क्लब में शनिवार को ‘महिला, अपराध और मीडिया’ विषय पर हुए परिसंवाद में बोल रही थीं। डॉ. वर्तिका ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते क्राइम के मद्देनजर जनता को नेताओं के इस्तीफे मांगने होंगे। पुलिस अफसरों को सस्पेंड करने की मांग करनी होगी। इसकी वजह यह है कि किसी आईपीएस का महज ट्रांसफर कर देने से फर्क नहीं पड़ता। अफसोस की बात ये है कि हम लोग तभी बोलते हैं जब हमारे साथ या हमारे किसी अपने के साथ कोई हादसा होता है। अफसर और नेता कहते हैं छोटे शहरों में अपराध कम हैं। मैं बधाई देती हूं छोटे शहरों की महिलाओं को। वे आवाज उठाती हैं। जुल्म सहन नहीं करतीं। बड़े शहरों में बड़े घरों की महिलाएं सबकुछ सहती जाती हैं। उन्हें भी हिम्मत दिखानी होगी। महिलाएं नहीं दिखा पाती हिम्मत : डॉ. वर्तिका नंदा डॉ. वर्तिका ने कहा कि महिलाएं इतनी हिम्मत नहीं दिखा पाती कि थाने जाकर किसी के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाएं। अगर वे हिम्मत कर भी लेती हैं तो पुलिस दिलचस्पी नहीं लेती। हमारी कानून व्यवस्था कुछ ऐसी है कि जब अपराध हो जाता है, उसके बाद ही सब जागते हैं। मीडिया को भी ये ध्यान रखना होगा कि वो किसे डिफेंड करे। संवेदनशील होना जरूरी : रश्मि सिंह नेशनल वुमन एम्पावरमेंट मिशन की डायरेक्टर रश्मि सिंह ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ क्राइम के आंकड़े हैरान कर देते हैं। अहम बात ये है कि हमें ऐसे मामलों के प्रति संवेदनशील होना होगा। सिर्फ सरकार या कानून ही काफी नहीं है। सुनें बस दिल की आवाज मैं एक छोटे से गांव में पला-बढ़ा हूं। मीडिया जगत में काम कर रहा हूं। ग्रोथ का मंत्र यह है कि मैं कभी भेड़चाल में नहीं पड़ा। हमेशा अपने दिल की सुनी। मीडिया पर्सनालिटी दीपक चौरसिया ने यह बात कही। शनिवार को वर्चुअल वॉयेज में सेमिनार ‘भेड़चाल छोड़ो, दिल की बात सुनो’ में उन्होंने कॅरियर के टिप्स दिए। खुद चुनें अपना कॅरियर- श्री चौरसिया ने कहा कि कभी भी अपने आसपास के लोगों को देखकर कॅरियर चुनने के बजाय अपने दिल की सुननी चाहिए। किसी को फॉलो करने से हम अपनी पहचान खो देंगे। अपने टैलेंट को कमतर समझकर किसी और को फॉलो नहीं करें। इससे आपका अस्तित्व ही नहीं, आत्मा भी खो जाएगी। अटल इरादों से सफलता जरूर मिलती है। बचपन से हम सुनते आए हैं सुनो सबकी और करो मन की। प्रोग्राम में वर्चुअल वॉयेज के डायरेक्टर अभय जैन व स्टाफ मैंबर्स भी मौजूद थे।

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