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यशवंत क्लब ने सदस्यों से ले लिया मनोरंजन कर, जमा नहीं कराया

9 वर्ष पहले
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इंदौर . यशवंत क्लब ने मनोरंजन कर के नाम पर अपने चार हजार सदस्यों से जो राशि वसूली थी, उसे वाणिज्यिक कर विभाग में जमा नहीं किया। मामले की पोल तब खुली जब विभाग ने क्लब को 20 लाख रुपए जमा करवाने का नोटिस दे दिया। नोटिस मिलने के बाद क्लब में अंदरूनी बवाल शुरू हो गया है।
चेयरमैन परमजीत सिंह छाबड़ा और सचिव सुनील बजाज का गुट फिर आमने-सामने हो गया है। चेयरमैन गुट इस बात से नाराज है कि क्लब को इतना बड़ा नोटिस मिल गया और सचिव ने बताया तक नहीं। दोनों गुटों में पत्र युद्ध भी चल रहा है जिसमें एक-दूसरे पर मनमानी और अनियमितता के आरोप लगाए जा रहे हैं। बजाज का कहना है- मैं जो कर रहा हूं, क्लब की भलाई के लिए है, क्लब टैक्स की श्रेणी में नहीं आता है, इसलिए नहीं भरा। इसमें मैनेजिंग कमेटी क्या करेगी।
वहीं चेयरमैन का कहना है - क्लब हमेशा टैक्स भरता आ रहा है, अब पेनाल्टी लगेगी तो सचिव की जिम्मेदारी होगी। मामले में आपात बैठक बुलाई गई है।
हर महीने करीब साढ़े तीन लाख बनता है टैक्स - क्लब में करीब 4000 सदस्य है। हर सदस्य से फीस के अलावा मनोरंजन व अन्य कर के रूप में 90 रुपए अतिरिक्त लिए जाते हैं। इस तरह केवल टैक्स के नाम पर ही हर महीने करीब साढ़े तीन लाख रुपए वसूले जाते हैं।