जबलपुर. हाईकोर्ट ने उन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, जिन्हें पन्ना के जिला सत्र न्यायालय ने आज से 19 साल पहले बरी किया था। जस्टिस अजित सिंह और जस्टिस एनके गुप्ता की युगलपीठ ने पूरे मामले का बारीकी से परीक्षण करने के बाद यह फैसला सुनाया। साथ ही आरोपियों को कहा गया है कि वे जल्द से जल्द निचली अदालत में आत्मसमर्पण करें।
हाईकोर्ट में यह मामला राज्य सरकार की ओर से दायर किया गया था। अभियोजन के अनुसार सतना जिले के अजयगढ़ पुलिस थानांतर्गत ग्राम बन्हारीकला में रहने वाला अनंदीलाल 16 जुलाई 1992 की शाम करीब 6 बजे कुछ लोगों के साथ पूजा करने गया था। शाम करीब 7 बजे आरोपी मैयादीन अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचा।
मैयादीन का कहना था कि अनंदीलाल के पुत्र ने उसके पुत्र को चप्पल मारी है, इसलिए वह उसे नहीं छोड़ेगा। यह कहते हुए आरोपी मैयादीन ने अनंदीलाल के सिर पर लाठी से वार कर दिया। उसके बाद मैयादीन के साथियों ने भी अनंदीलाल पर लाठियों से जमकर वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
बीच-बचाव करने वाले राममिलन को भी चोटें आईं थीं। खुद राममिलन अनंदीलाल की लाश को लेकर थाने पहुंचा और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज करके मैयादीन, रामस्वरूप, सीताराम, तुलसीदास और बंदू उर्फ बंदी के खिलाफ मामला दर्ज करके कोर्ट में चालान पेश किया था।
पन्ना की जिला सत्र न्यायालय ने 9 जनवरी 1995 को आरोपियों को मारपीट के आरोपों में सजा सुनाई थी, जबकि सभी को अनंदीलाल की हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया था। इस पर राज्य सरकार की ओर से यह अपील दायर करके सभी आरोपियों की दोषमुक्ति को चुनौती दी गई थी।
मामले पर हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने चिकित्सकीय रिपोर्ट का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता विजय पाण्डेय ने पक्ष रखा। विचारण के दौरान युगलपीठ ने पाया कि मृतक अनंदीलाल के सिर पर जो पहली चोट पड़ी थी, वह इतनी जोरदार थी, जिससे उसके सिर पर फ्रैक्चर हो गया था।
उसके बाद उसने कई बार उठने की कोशिशें कीं, लेकिन आरोपियों के लगातार वार करने के कारण वह नाकाम रहा। मौके पर मौजूद गवाहों के बयानों और चिकित्सकीय रिपोर्टों पर गौर करने के बाद युगलपीठ ने पाया कि जिस ढंग से वार किए गए उनसे आरोपियों की मंशा स्पष्ट थी कि वे अनंदीलाल की हत्या ही करना चाहते थे। युगलपीठ ने आरोपी मैयादीन और रामस्वरूप को दोषी पाते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।