सड़कों पर चलना दिनों-दिन दुश्वार होता जा रहा है। सड़कें चौडी़ होने के बावजूद संकरी होती जा रही हैं जरा देर में जाम लग जाता है। वजह वाहनों की मात्रा अधिकाधिक होना है। आज सड़कों पर साइकिलें कम और मोटर साइकिलें व कारें ज्यादा दिख रही हैं। दसवी के बाद लगभग हर बच्चे के हाथ में गाडी की चाबी होती है। वाहनों की सर्वाधिक खरीदी त्योहारों पर होती है। अभी के आंकड़े बता रहे हैं िक आने वाली दीवाली पर भारी संख्या में वाहनों की बुकिंग हो चुकी है।
फिटनेस का ध्यान रखें
इसमें से कुछ वाहन तो अपनी उम्र कब की पार कर चुके हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एमएल पटेल के मुताबिक वाहनों की िफटनेस कराना अनिवार्य हेाता है। क्योंकि बिना फिटनेस के वाहन सड़कों पर बेवजह वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं। यह बात जांच में साबित भी हुई है। सबसे ज्यादा खतरा डीजल वाहनों से होता है। ये डीजल वाहन सड़क पर वायु प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं और लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हैं। यदि जल्द ही शहर में बढ़ रही वाहनों की संख्या पर रोक न लगी तो लोगों को कई तरह की सांस संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
वाहनों की संख्या में प्रतिवर्ष 60 हजार का इजाफा हो रहा है। इससे ट्रैफिक की समस्या निर्मित होती है। यदि ज्यादा से ज्यादा लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करेंगें तो ट्रेफिक सुधरेगा। जरूरत न होने पर वाहन सड़क पर लेकर न चलें।
- सुरेन्द्र जैन, एएसपी ट्रैफिक
किसी भी प्रकार का प्रदूषण वैसे तो सेहत को नुकसान पहुंचाता ही है,इसमें भी वायु प्रदूषण श्वास संबंधी बीमारियों के लिए घातक साबित होता है। दमा से जूझ रहा व्यकित यदि इस प्रदूषण की गिरफ्त में आए तो तकलीफ होना तय है साथ ही अन्य श्वास संबंधी बीमारियां भी हो सकती हैं।
- डा. जितेन्द्र भार्गव, फेफडा रेाग विशेषज्ञ, मेडिकल
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