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धूमधाम से मना नर्मदा माई का जन्मदिन, तटों पर उमड़ें लाखों भक्त

5 वर्ष पहले
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जबलपुर मां नर्मदा का जन्मोत्सव संस्कारधानी में बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। शहर की हर गली, कूचे से लेकर बस्ती, कालोनी में जगह-जगह भण्डारे का आयोजन किया गया, तो महाआरती कर लोगों ने भक्ति गीत भी गाए।
सुबह सूर्य की पहली किरण के साथ जो आयोजन शुरू हुए तो देर रात तक नर्मदा तटों पर धार्मिक अनुष्ठान थमे नहीं। रवि रेवा के विशेष पुण्य दिवस पर शहर में हर तरफ ऐसा नजारा था जैसे हर आदमी भक्ति में लीन है और मां के जयकारे लगा रहा है। शहर के भीतरी हिस्सों का जो नजारा था वही नर्मदा के पवित्र तटों पर भी था। जिलेहरी, उमाघाट, ग्वारीघाट, सिद्धघाट, खारीघाट, तिलवारा, लम्हेटा, भेड़ाघाट, न्यू भेड़ाघाट, सरस्वती घाट आदि अन्य पवित्र घाटों पर हजारों, लाखों की संख्या में भक्त जुटे। किसी ने आस्था के साथ दीपदान कर दर्शन किये तो किसी ने मां का दुग्धाभिषेक कराकर आशीर्वाद मांगा। जो स्नान करने आये उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ डुबकी लगाई और अपने जीवन को धन्य किया। नर्मदा तटों की ओर जाने आने वाली हर सड़क, गली आज भक्तों से भरी हुई थी। तटों पर आस्था का समागम था, तो गलियों में नर्मदे हर के जयकारे गूंज रहे थे।
मक्रवाहिनी का पालकी दर्शन
तिलक भूमि की तलैया से मक्रवाहिनी मंदिर पानी दरीबा तक बधाव पालकी शोभायात्रा निकाली गई। मंदिर समिति के द्वारा यह आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में भक्त उमड़े और इसके दर्शन किये। सुबह से देर रात तक मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया।
90 प्रतिमाओं की स्थापना
पिछले पांच, छह सालों से नर्मदा जयंती महोत्सव का स्वरूप कितना विशाल होता जा रहा है इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि शहर में इस बार मां नर्मदा की 90 प्रतिमाओं की स्थापना की गई। इसमें भी शहर से नजदीक बरेला टाउन में ही 5 प्रतिमाएं रखी गईं। हर साल यह उत्सव बड़ा रूप लेता जा रहा है। अलग-अलग समितियों ने इन प्रतिमाओं की स्थापना की। पुलिस के अनुसार इन प्रतिमाओं का विसर्जन आज सोमवार को भी किया जाएगा।
शिव वरदानी मां नर्मदा
नदियाघाट में रजत जयंती महोत्सव पर भक्तों ने नर्मदा पूजन के बाद आहुतियां अर्पित की। इस अवसर पर ऋचा गोस्वामी, स्वामी महेन्द्रानंद ने नर्मदा महिमा का बखान किया और कहा कि मां शिव वरदानी हैं।
शहीदों की याद में जली अमर जवान ज्योति
सियाचिन ग्लेशियर के -60 डिग्री तापमान पर अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर सपूतों की याद में नर्मदा महोत्सव आयोजन महासमिति द्वारा ग्वारीघाट झंडा चौक पर सभी 10 शहीदों के चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई। इस अवसर पर अमर जवान ज्योति भी स्थापित की गई ।
मां रेवा मुनियों की तपस्या स्थली
ग्वारीघाट तट पर महाआरती के बाद महामण्डलेश्वर डॉ. स्वामी प्रज्ञानंद महाराज ने कहा कि मां नर्मदा ऋषि, मुनियों की तपस्या स्थली है। मां नर्मदा में सभी तीर्थों का फल है। यह नर्मदा का तेजोबल है कि यहां पर तप, जप करने से सिद्धि की प्राप्ति होती है। साकार और निराकार के बीच मां नर्मदा निराकार अवतार हैं।
प्रसाद के लिए बढ़े हाथ
शहर में जगह-जगह धार्मिक अनुष्ठान के बाद भण्डारा, प्रसाद का भोग मां को लगाया गया, उसके बाद यह भक्तों को बांटा गया। खीर, पुड़ी, हलुआ, साबूदाना की खिचड़ी, मिष्ठान्न, ऋतु फल से लेकर विभिन्न किस्मों के भोज मां को अर्पित किये गए। लोगों ने पूरी आस्था के साथ इसको ग्रहण किया। सुबह से रात तक यह क्रम चलता रहा। अलग-अलग मंदिरों में भी भण्डारे का आयोजन किया गया।
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