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जाली नोटों की पहचान जरूरी, कार्यशाला में बताए तरीके

5 वर्ष पहले
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जबलपुर. जाली नोटों के बढ़ते चलन पर रोक लगाने के उद्देश्य से एसपी के निर्देश पर एसबीअाई अधिकारियों की मौजूदगी में पुलिस कंट्रोल रूम में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान मौजूद पुलिस अधिकारियों को जाली नोटों की सही तरीके से पहचान कराए जाने संबंधी बिंदुअों से अवगत कराया गया।
इस दाैरान पुलिस अधिकारियों की शंका का समाधान भी किया गया। इस दौरान एएसपी क्राइम आशीष खरे, एएसपी संजय साहू व निरीक्षक से एएसआई स्तर के अधिकारी मौजूद थे। कार्यशाला में बैंक अधिकारी हर्षिल सिरपुरकर ने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से 1 हजार, 5 सौ व सौ रुपये के जाली नोटों की पहचान संबंधी जानकारी प्रदान की।
इस दौरान उन्होंने बताया कि नोटों के दोनों ओर छपे चिन्हों का सटीक मेल खाना चाहिए, जैसे कि 1 हजार के नोट में 1000 लिखा रहता है यह अंक का आधा हिस्सा आगे व आधा हिस्सा पीछे मुद्रित रहता है, लेकिन रोशनी में देखने पर यह अंक एक ही नजर आता है। इसके अलावा वाटर मार्क खिड़की, रंग बदलने वाली स्याही, सुरक्षा धागा के साथ ही अन्य पहचान में माइकोलेटरिंग से भी इसकी पहचान की जा सकती है।
इसमें गांधी जी के चित्र और खड़ी पट्टी के बीच के क्षेत्र में मैग्नीफाइंग ग्लास से अक्षर आरबीआई और अंक 1000 देखे जा सकते हैं। साथ ही गुप्त प्रतिमा एवं उभारदार मुद्रण से इसकी सही पहचान की जा सकती है। उन्होंने बताया कि आरबीआई खुद पेपर बनवाती है और यह पेपर मार्केट में नहीं मिलता है। नोटों में माइको प्रिंटिंग होती है, जिसकी नकल कर पाना बहुत ही मुश्किल कार्य है।
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