जबलपुर. पश्चिम-मध्य रेलवे के कोटा वर्कशॉप में कभी नौकरी पर रहे पूर्व कर्मचारी ने महाप्रबंधन दफ्तर के बाहर अजीब तरह की चेतावनी दे डाली। 10 साल पहले नौकरी गवां चुके नरेश ने कहा कि सर्विस वापस नहीं दी जाती है तो वह परिवार सहित यहीं जान दे देगा।
इतना सुनते ही हड़कंप मच गया। आरपीएफ और सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस कर्मी नरेश को काफी देर तक समझाते-बुझाते रहे।
पमरे के कोटा में स्थित वर्कशॉप में पदस्थ नरेश कुमार पिछले कई सालों से बर्खास्त है, लेकिन उसने रेल प्रशासन के समक्ष मानवीयता के आधार पर प्रकरण पर पुन: विचार कर नौकरी में बहाल करने की अपील कर रखी है। नरेश का कहना रहा कि उसकी कोई सुनवाई ही नहीं हो रही। पत्नी और बेटे के साथ जबलपुर पहुंचे रमेश का कहना था कि नौकरी न होने की स्थिति में उसके परिवार का जीवन दूभर हो रहा है।
अफसरों ने दबाकर रखा मामला
नरेश का कहना था कि कोटा में उससे कहा गया कि डिवीजन स्तर पर कोई रुकावट नहीं है, इस मामले में जो भी निर्णय होगा वह जबलपुर मुख्यालय से होगा। उसे यह भी बताया गया कि उसके प्रकरण को जबलपुर जोन कार्यालय में अधिकारियों द्वारा दबाकर रखा गया है। नरेश ने बताया कि इतना सुनने के बाद उससे रहा न गया और सीधे जबलपुर के लिए निकल पड़ा।
पहले समझाइश फिर थोड़ी सी सख्ती
आत्महत्या की चेतावनी की खबर फैलते ही आरपीएफ और पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। पहले तो काफी देर तक उसे समझाइश दी जाती रही। मामला कुछ नरम हुआ, इसके बाद पुलिस बल ने उसे दफ्तर के सामने से हटने की लिए हल्की से सख्ती दिखाई। इसके कुछ देर बाद ही नरेश परिवार सहित वहां से कहीं और के लिए रवाना हो गया।