जबलपुर. दो माह की कवायद के बाद कलेक्ट्रेट के अधिवक्ताओं को बैठने की जगह तो मिल गई है, लेकिन मच्छरों ने इनका बैठना दूभर कर दिया है। इतना ही नहीं लंबे समय से बंद पड़े इस क्षेत्र में जंगली पौधों का इतना आतंक है कि जब इन्हें उखाड़ कर फेंको उसके एक सप्ताह बाद फिर से ये अपनी रंगत में आ जाते हैं।
यहां व्यवसाय कर रहे लोगों को इस मुसीबत में भी यह सुकून है कि लोगों का यहां आना-जाना तो प्रारंभ हो गया है। कलेक्ट्रेट आने वाले लोगाें को अब नोटरी कराने से लेकर शपथपत्र के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है।
एक सैकड़ा वकील अौर एक नोटरी का डेरा
प्रशासन द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर से खदेड़े जाने के बाद किसी तरह से यहां के अधिवक्ताओं को कलेक्ट्रेट परिसर के बाजू से ही आदिवासी विकास विभाग के समीप करीब 3 हजार वर्गफुट जमीन उपलब्ध कराई गई है। यह क्षेत्र पिछले लंबे समय से बिना उपयोग के पड़ा रहने से यहां बड़े-बड़े जंगली पौधों का साम्राज्य था।
प्रशासन ने इसे साफ तो करवा दिया है, लेकिन अधिवक्ताओं की बैठने की जगह अभी भी ठीक न हीं है। इस क्षेत्र में प्रारंभिक दौर में करीब एक सैकड़ा अधिवक्ताओं ने अपना डेरा जमा लिया है। इसके अलावा एक नोटरी को भी जगह दी गई है।