जबलपुर. एंटी एयर क्राफ्ट गन एल 70 को आधुनिक बनाने के लिए जीसीएफ ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके लिए एक गन को प्रयोग के तौर पर भारत इलेक्ट्रिकल लिमिटेड के पास भेजा जा रहा है। यह तोप सम्भवत: सोमवार 15 दिसम्बर को जीएम एनके सिन्हा द्वारा रवाना की जाएगी।
इसके बाद गन को आधुनिक बनाने के बाद तोप का ट्रायल होगा और उसके बाद तोपों की अगली खेप रवाना कर दी जाएगी। देश की सबसे बड़ी तोप 155 एमएम धनुष के निर्माण की चुनौती के साथ जीसीएफ नई टेक्नाेलॉजी के साथ एल 70 गन का अपग्रेडेशन का काम भी करेगा। शुरूआती दो गनों को अपग्रेड किये जाने के बाद उनके परीक्षण पर ही इन गनों की सफलता निर्भर करेगी।
दुश्मन के हवाई जहाजों को मार गिरने के लिए उपयोग में आने वाली एल 70 गन को अपग्रेड किये जाने का मामला पिछले 10 साल से लम्बित था। एल 70 गन का उपयोग कारगिल युद्ध के दौरान ऊंची पहाड़ी पर बम बरसाने में भी किया गया था। इस तोप में ऐसे इलेक्ट्राॅनिक उपकरण लगाना थे, जिनकी मदद से दुश्मन के विमानों की पोजीशन पता लग सके।
इसके अलावा ऐसे उपकरणों को लगाना था, जिससे उड़ते विमानों पर सटीक निशाना लगा सके। रक्षा मंत्रालय ने देशी और विदेशी अनेक कम्पनियों से सुझाव मांगे थे।एंटी एयर क्राफ्ट गन को आधुनिक बनाने में बीईएल ने चुनौती स्वीकार की और जीसीएफ के साथ मिलकर अपग्रेडेशन के काम को पूरा करने के लिए एमओयू साइन कर लिया।
जीसीएफ एन 70 गन को आधुनिक बनाने का काम करेगा, वहीं बीईएल गन में कम्प्यूटर और इलेक्ट्राॅनिक उपकरण लगाएगा। यह काम दोनों संस्थान मिल कर करेंगे और अपग्रेड करने के बाद गन की टेस्टिंग का काम जीसीएफ के जिम्मे होगा। एल 70 गन के बमों को पहले से ही सेंसरयुक्त बना दिया गया है, ताकि ये बम विमान का पीछा कर उसे तबाह कर सके।