( मृत हेमलता )
जबलपुर । नौ साल में एक दिन भी हमारी बेटी को सुकून नहीं मिला। उसके साथ मारपीट होना तो रोज का काम था, खाना भी ठीक से नहीं मिलता था। पति और सास हमारी बेटी को सिर्फ इसलिए प्रताड़ित करते थे कि वो बेटियां पैदा करती थी। ये आरोप अहमदाबाद से आए हेमलता राठौर की मां वंदना राठौर और पिता कैलाशचंद्र राठौर ने पुलिस को दिए अपने बयानों में लगाए हैं। सोमवार को शहर पहुंचने के बाद हेमलता के माता-पिता, बहन शिल्पा, भाई मयूर और बुआ-मौसा-मौसी मिलाकर कुल दस सदस्य सबसे पहले मेडिकल पहुंचे, जहां पुलिस ने हेमलता और उसकी 6 माह की बेटी पाखी के शव दिए। दोनों शव दरहाई स्थित सचिन राठौर के घर पहुंचे और फिर उन्हें अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। शाम 6 बजे अहमदाबाद से आया हेमलता का परिवार कोतवाली थाने पहुंच गया, जहां पुलिस ने एक-एक करके सभी के बयान दर्ज किए। हेमलता की बहन शिल्पा का कहना था कि नौ साल पूर्व हुई शादी में जीजा सचिन सिर्फ एक बार ही हेमलता को लेकर अहमदाबाद आया था। जरा सी बीमार होने पर उसे मायके भेज दिया जाता था। हेमलता को जब बात करनी होती थी तो उसे सास अपने
मोबाइल से अपने पास बैठाकर बात कराती थी, जिसके कारण वो अपनी परेशानियां खुलकर नहीं बता पाती थी।
बंधक बनाकर रखते थे
हेमलता के भाई मयूर ने बताया कि उसकी बहन को सचिन अपनी मां के कहने पर घर में बंधक बनाकर रखता था। किसी रिश्तेदार या सामाजिक शादी में उसे ताले में बंद करके सभी चले जाते थे और खाना भी टिफिन में लाकर देते थे।
एक बार हो चुका है अबॉर्शन
हेमलता की मां विमला ने बताया कि बड़ी बेटी होने के बाद सचिन और उसकी मां ने 3 साल पूर्व हेमलता के दूसरे बच्चे होने पर उसकी गैरकानूनी तरीके से सोनोग्राफी करवाई थी। जिसमें फिर से बेटी होने की बात पता चलने पर उसका जबरन अबॉर्शन करा दिया गया था। अबॉर्शन होने से हेमलता की तबियत बिगड़ गई थी, जिसकी वजह से उसे अहमदाबाद भेज दिया गया था। विमला राठौर के अनुसार पाखी के जन्म के समय उन लोगों ने सख्त रवैया अपनाया था, जिसके कारण उसका जन्म हो गया था, वरना इस बार भी अबॉर्शन करा दिया जाता।
क्या है मामला
उल्लेखनीय है कि शनिवार की रात दरहाई निवासी गल्ला व्यापारी सचिन राठौर की पत्नी हेमलता ने अपनी दुधमुंही बच्ची 6 माह की पाखी का गला घोंटने के बाद खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस सनसनीखेज वारदात की जानकारी मिलने पर पुलिस ने दोनों शवों को मेडिकल में रखवा दिया था। चूंकि हेमलता के मायके वाले अहमदाबाद से नहीं आ सके थे, लिहाजा दो दिन से शव मेडिकल मरचुरी में रखे हुए थे।
हेमलता के मायके वाले अहमदाबाद से आज शहर पहुंचे थे, जिसके बाद दोनों शव परिजनों के सुुपुर्द कर दिए गए हैं। मायके वालों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं, अब उनके बयानों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
-भरत सिंह राजपूत
थाना प्रभारी, कोतवाली
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