जबलपुर. मप्र सरकार की वर्ष 2015-16 के लिए बनाई गई नई आबकारी नीति को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। एक जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस आरएस झा की युगलपीठ ने वाणिज्य कर विभाग के प्रमुख सचिव और आबकारी आयुक्त को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही याचिकाकर्ता की शिकायतों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट 27 फरवरी तक पेश करने कहा गया है। अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी।
यह याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपाण्डे की ओर से दायर की गई है। आवेदक का कहना है कि वर्ष 2015-16 के लिए बनाई गई नई आबकारी नीति की अधिसूचना 21 जनवरी 2015 को जारी हुई है।
याचिका में आरोप है कि सरकार द्वारा बनाई गई नई नीति पूरी तरह से अवैध है और वह वैधानिक नियमों का पूरी तरह से उल्लंघन कर रही है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नई नीति में शराब की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की बजाय उसको बढ़ावा दिया जा रहा है, जो अवैधानिक है।
याचिका में कहा गया है कि आबकारी अधिनियम के मुताबिक नगर निगम और केन्ट क्षेत्रों में दुकानों के लिए विशेषज्ञों की कमेटी बनाई जानी चाहिए और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग से नीति का निर्धारण होना चाहिए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार ने इन कमेटियों का गठन नहीं किया। आरोप है कि शराब ठेकेदारों ने सिंडीकेट बना लिया है और वे मनमाने दामों पर नकली शराब बेच रहे हैं। इसी तरह नई नीति में देशी शराब दुकान से अंग्रेजी शराब बेचने को भी शामिल किया गया।
यह पूरी तरह से आबकारी अधिनियम का उल्लंघन है और तो और सरकार ने नई नीति में शराब की बिक्री के समय में भी बढ़ोत्तरी की, जो अवैधानिक है। आवेदक का कहना है कि इस बारे में सक्षम अधिकारियों को दी गईं शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इन आधारों के साथ दायर याचिका में राहत चाही गई है कि विशेषज्ञ कमेटी के गठन करने, बाजार में नकली शराब बेचने पर पाबंदी लगाने और सिंडीकेट पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश सरकार को दिए जाएं।
मामले पर मंगलवार हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष खुद रखा। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने याचिका में बनाए गए अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए सरकार को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।