जबलपुर. भेड़ाघाट नगर पंचायत की अनुमति के बिना मे. झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा ट्रांसमिशन लाइन बिछाने संबंधी निर्माण कार्य पर हाईकोर्ट ने सशर्त रोक लगा दी है। एक जनहित याचिका का निराकरण करते हुए चीफ जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस आलोक अराधे की युगलपीठ ने कहा है कि जब तक नगर पंचायत की सीएमओ से एनओसी नहीं मिलती, तब तक निर्माण कार्य न किया जाए। साथ ही टॉवरों की स्थापना की जगह बदले जाने से संबंधित आपत्ति कलेक्टर को दिए जाने के निर्देश भी युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को दिए हैं।
यह याचिका नगर पंचायत भेड़ाघाट के पार्षद दुर्गेश यादव की ओर से दायर की गई थी। आवेदक का कहना था कि 31 जुलाई 2013 को हरियाणा की मे. झाबुआ पावर लिमिटेड को भेड़ाघाट के पास 6 सौ मेगावाट की प्लान्ट लगाने की इजाजत तो गई, लेकिन यह शर्त भी लगाई गई कि कंपनी को पहले संबंधित विभागों से एनओसी लेनी होगी। आवेदक का कहना था कि कंपनी जिस क्षेत्र में ट्रांसमिशन टॉवर लगा रही है, उनमें से चार गांव भेड़ाघाट नगर पंचायत के अधीन आते हैं।
इसके लिए अभी तक कंपनी ने नगर पंचायत से कोई भी एनओसी नहीं ली। ऐसे में लाइन बिछाने और टॉवर लगाने जैसी कार्रवाई अवैधानिक है। इस मामले पर विगत 11 सितम्बर को युगलपीठ ने टॉवरों की स्थापना पर रोक लगा दी थी। मामले पर सोमवार को आगे हुई सुनवाई के बाद युगलपीठ ने मामले का निराकरण करते हुए टॉवरों की स्थापना पर सशर्त रोक बरकरार रखी है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनुज अग्रवाल ने सुनवाई के दौरान पक्ष रखा।