जबलपुर. शोभापुर में पिछले दो माह से पानी के लिए मारामारी मची है तो अधारताल में पिछले कई सालों से लोग एक ही समस्या से जूझ रहे हैं। नगर निगम पानी पर करोड़ों रुपए पानी की तरह ही बहाता है, पर लोगों की सुविधाओं पर ध्यान ही नहीं दिया जाता।
नगर निगम में जल व्यवस्था को संभालने के लिए करीब तीन माह पहले बदलाव किए गए और दो अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई, ऐसा लगा अब बदलाव आएगा, पर इसका उलटा असर हुआ है। जानकारी न होने के कारण ही अब अधिकारी बोझ बनते जा रहे हैं।
रांझी जलशोधन संयंत्र से निकली पाइप लाइन से गोकलपुर, शोभापुर, उदय नगर, व्हीकल फैक्ट्री, घमापुर और हनुमानताल तक पानी सप्लाई किया जाता है, पर पनेहरा के पास व्हीकल मोड़ पर एक लीकेज ने मुसीबत खड़ी कर दी है। इस लीकेज के कारण करीब 3 लाख लाख लोगों को मुसीबतें झेलनी पड़ रही हैं। शोभापुर, उदय नगर और व्हीकल फैक्ट्री तक जाने वाली लाइन में यह लीकेज है और कई दफा बनाने के बाद भी यह लीकेज सुधर ही नहीं पाता। हाल ही में निगम ने इस स्स्थान पर मिट्टी का पहाड़ बनाया है, पर इससे भी कुछ नहीं हो पा रहा है। वही मिट्टी अब कीचड़ बनकर आवाजाही में परेशानियां पैदा कर रही हैं। शोभापुर में न तो सुबह ही ठीक से पानी मिल पाता है और न ही शाम को। कुछ ही देर में सप्लाई करने के बाद नलों से हवा निकलने लगती है और इसके बाद सन्नाटा छा जाता है। निगम अधिकारी इस मामले में कुछ नहीं बोलते, उनका सिर्फ इतना ही कहना है कि लाइन पुरानी हो गई है, जिसे बदलना होगा।
अधारताल के कई क्षेत्रों में संकट
अधारताल नेता काॅलोनी, अम्बेडकर काॅलोनी, संजय नगर आदि में कई सालों से लोग जलसंकट झेल रहे हैं। यहां निगम ने टंकी बना दी, लेकिन घरों तक लाइन ही नहीं भेजी गई है। अब लोग जब पानी की मांग करते हैं तो निगम अधिकारी जवाब देते हैं कि इतनी बड़ी टंकी तो बना दी, इस पर लोगों का कहना है कि बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर, पंक्षी को छाया नहीं फल लागे अति दूर। यह पुरानी कहावत ही उनके जख्मों पर थोड़ा मरहम का काम करती है। आखिर लोगों को इससे क्या मतलब कि निगम ने यह किया या वह किया, उनकी समस्या हल हो बात तो तभी बनेगी।
अभी यह हाल तो गर्मी में क्या होगा
सर्दी में यदि यह सितम है तो गर्मी में क्या होगा, यह सोचकर ही हालत खराब हो जाती है।
पिछली गर्मी में तो कई क्षेत्र हलाकान रहे, कहीं लीकेज तो कहीं बिजली की कमी के कारण इस बार भी यदि यही हाल रहा तो मुसीबत बड़ी हो जाएगी। निगम अधिकारी आखिर इस समस्या पर इतने खामोश क्यों हैं। एक समय था कि किसी क्षेत्र में जलसंकट की सूचना मिलने पर ही पूरा अमला सक्रिय हो जाता था और कुछ ही घंटों में समस्या को हल कर दिया जाता था, पर अब तो काेई आह ही नहीं निकलती।