जबलपुर. शहर को मेट्रो रेल की सौगात देने का वादा सीएम
शिवराज सिंह चौहान पहले ही कर चुके है। सीएस डिसा एंटोनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए जितनी जल्दी हो एलायमेंट तैयार कर भेजो, ताकि जबलपुर में भी मेट्रो रेल का सफर संभव हो सके, लेकिन शहर के नेताओं को इससे कोई सरोकार नहीं है।
अधिकारियों को तो यह तक नहीं मालूम है कि ऐसा कोई प्रस्ताव भी बनाकर भेजा जाना है। अब जबकि शासन के पास कोई रिपोर्ट ही नहीं होगी तो भला कहां से शहर के विषय में चर्चा होगी। आश्चर्य की बात है कि पूरा एक साल बीत गया, लेकिन अाज तक फिजिबिलिटी रिपोर्ट तक तैयार नहीं की गई है।
प्रशासनिक स्तर पर कोई सुगबुगाहट नहीं
माह जनवरी 2014 में भोपाल में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री द्वारा भोपाल व इंदौर की तर्ज पर जबलपुर में भी मेट्रो रेल चलाने की बात कही गई थी। इसके बाद 13 फरवरी 2014 को मुख्य सचिव डिसा एंटोनी ने जबलपुर प्रवास के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक आयोजित कर मुख्यमंत्री की इस घोषणा से उन्हें अवगत कराया, साथ ही उन्होंने कलेक्टर तात्कालिन विवेक पोरवाल को शीघ्र ही मेट्रो रेल के लिए एलायमेंट बनाने के निर्देश दिए थे। इस दौरान आनन-फानन में फाइलों में इसकी कार्ययोजना तैयार भी होने लगी थी। इस कार्य को अंजाम दे रहे थे तात्कालिन एडीएम शीलेंद्र सिंह, जिन्होंने इसके लिए शासन से पत्र व्यवहार भी किया।
अब इंतजार था तो भोपाल से सर्वे टीम के आने का, जिसके आते ही डीपीआर तैयार की जाना थी। इस दौरान इन दोनों ही अधिकारियों का तबादला हो गया अौर अागे की कार्रवाई भी दफन हो गई। वर्तमान हालात यह है कि प्रशासनिक अधिकारियोें को यह तक नहीं मालूम है कि मेट्रो रेल का कोई प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा था।
कब क्या हुआ अौर निर्देश
> जनवरी माह में सीएम ने भोपाल में की घोषणा
> 13 फरवरी को सीएस ने जबलपुर में बैठक कर एलायमेंट बनाने दिए निर्देश
> सीएम ने भी इंदौर भोपाल से पहले यहां मेट्रो रेल की सौगात देने कहा
> 28 मई को भोपाल से आए अधिकारियों ने फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने कहा
> 6 जून को शासन ने कलेक्टर कार्यालय को दी फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने की अनुमति
> बैठक में सीएस श्री एंटोनी ने कहा था कि सीधा बनाया जाए एलायमेंट
> 5 अगस्त में हुआ प्रारंभिक सर्वे
> ज्यादा से ज्यादा 50 किमी का दायरा ही शामिल किया जाए